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Kaithal News: दीक्षांत समारोह में 527 विद्यार्थियों को उपाधियां, 38 को स्वर्ण पदक

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संवाद न्यूज एजेंसी
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कैथल। आरकेएसडी कॉलेज परिसर में बुधवार को महर्षि वाल्मीकि संस्कृत विश्वविद्यालय कैथल का पहला दीक्षांत समारोह आयोजित किया गया। कार्यक्रम में राज्यपाल बंडारू दत्तात्रेय मुख्य अतिथि के रूप में पहुंचे। उनकी सुरक्षा में 350 से अधिक पुलिस कर्मियों को ड्यूटी पर लगाया गया था। इस समारोह में दीक्षांत समारोह में 2019-24 तक पढ़ाई करने वाले 527 विद्यार्थियों को उपाधियां प्रदान करने के साथ 38 विद्यार्थियों को स्वर्ण पदक दिए गए। इसमें 131 स्नातक (शास्त्री/बीए) और 396 स्नातकोत्तर (आचार्य/एमए) की परीक्षा उत्तीर्ण कर चुके विद्यार्थी शामिल रहे।

कार्यक्रम में विशिष्ट अतिथि के रूप में हरियाणा केंद्रीय विश्वविद्यालय महेंद्रगढ़ के कुलपति प्रो. टंकेश्वर कुमार व सारस्वत अतिथि के रूप में सोमनाथ संस्कृत विश्वविद्यालय गुजरात के कुलपति प्रो. सुकांत कुमार सेनापति उपस्थित रहे। इस अवसर पर विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. रमेश चंद्र भारद्वाज ने राज्यपाल एवं सभी सम्मानित अतिथियों का स्वागत किया।
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राज्यपाल एवं महर्षि संस्कृत विश्वविद्यालय मूंदड़ी के कुलाधिपति बंडारू दत्तात्रेय ने कहा कि वे अपने जीवन में तकनीक, आविष्कार व अनुसंधान में दक्षता प्राप्त कर सफलता हासिल करें। उन्होंने संस्कृत के महत्व को बताते हुए कहा कि भारत में लगभग सभी भाषाओं का मूल संस्कृत भाषा में है। यह हर्ष का विषय है कि अब संस्कृत भाषा का प्रचार-प्रसार बढ़ रहा है। साथ ही संस्कृत विश्वविद्यालय मूंदड़ी के विद्वानों ने दीक्षांत समारोह में पुस्तकों का विमोचन करवाकर ज्ञान का भंडार देश को प्रदान किया है।

उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालयों में रिसर्च जितना अधिक होगा, शिक्षा उतनी अधिक महत्वपूर्ण होगी। संस्कृत का स्थान भी आगे बढ़ना चाहिए। संस्कृत जितना आगे बढ़ेगी, देश उतना ही आगे बढ़ेगा। युवा अपनी भाषा में पढ़ने व बात करने में हीन भावना न लाएं, बल्कि आत्मविश्वास के साथ आगे बढ़ें। विकसित भारत के लिए भारत के सास्कृतिक ज्ञान को विश्व में ले जाना होगा। आप अपने जीवन में हमेशा ऊंचा लक्ष्य रखें। उन्हें हासिल करने में अनेक चुनौतियां सामने आऐगी, लेकिन इनसे घबराएं नहीं दृढ़ता संग आगे बढ़ें।

उन्होंने सभी युवाओं का आह्वान है कि वे संस्कृत भाषा का अध्ययन कर इसमें अनुसंधान करें। वे वेद, पुराण, रामायण व महाभारत के ज्ञान को लोगों तक ले जाने में अपना योगदान दें। मूंदड़ी संस्कृत विश्वविद्यालय भी संस्कृत में कम समय में ही सात स्नातक, आठ स्नातकोत्तर एवं पांच डिप्लोमा पाठ्यक्रम चलाने में सफल रहा है। इस समय महाविद्यालय में वेद, ज्योतिष, संस्कृत, व्याकरण, दर्शन, हिंदू अध्ययन, धर्मशास्त्र, योग और साहित्य के पाठ्यक्रम चल रहे हैं। योग, वास्तु शास्त्र, कर्मकांड और ज्योतिष में डिप्लोमा कार्यक्रम भी संचालित किए जा रहे हैं।

उन्होंने विश्वविद्यालय की ओर से पांच पुस्तकों व एक शोधपत्र का विमोचन किया और बधाई देते हुए कहा कि इन पुस्तकों में समाहित ज्ञान देश को आगे ले जाएगा। उन्होंने संस्थान की ओर से चलाए गए अभियान व विद्यार्थियों के कल्याण की योजनाओं की सराहना की। साथ ही कहा कि आज दीक्षांत समारोह के दौरान 180 छात्राओं डिग्री मिली है, यह महिला उत्थान का सराहनीय कार्य है। यह भी हर्ष का विषय है कि जिले का नेतृत्व एक महिला अधिकारी कर रही हैं। उन्होंने विश्वविद्यालय अधिकारियों का आह्वान किया कि अगले साल दीक्षांत समारोह विश्वविद्यालय परिसर में ही आयोजित किया जाए। इसके लिए 40 करोड़ रुपये की लागत से बनाए जा रहे भवन का निर्माण कार्य जल्द पूरा किया जाए।

इससे पहले हेलीपेड पर पहुंचने पर डीसी प्रीति एवं एसपी राजेश कालिया ने राज्यपाल का अभिनंदन किया। वहीं समारोह में विश्वविद्यालय के शैक्षणिक अधिष्ठाता प्रो. सत्य प्रकाश दुबे, कुलसचिव प्रो. संजय गोयल, परीक्षा नियंत्रक प्रो. भाग सिंह बोदला सहित विश्वविद्यालय की कार्यकारी परिषद, शिक्षा परिषद एवं कोर्ट के सदस्यों सहित कैथल के प्रतिष्ठित महानुभाव मौजूद रहे। समारोह राष्ट्रगान के साथ संपन्न हुआ।

रेडक्रॉस के राज्य महासचिव के आवास पर पहुंचे राज्यपाल ः दीक्षांत समारोह के बाद राज्यपाल बंडारू दत्तात्रेय सेक्टर 19 में स्थित रेडक्रॉस के राज्य महासचिव डाॅ. मुकेश अग्रवाल के आवास पर पहुंचें। जहां डाॅ. मुकेश अग्रवाल ने परिवार व जिले के महत्वपूर्ण लोगों सहित उनका स्वागत किया। इस अवसर पर आरकेएसडी प्रबंधक समिति से श्याम बंसल सहित डाॅ. अशोक गर्ग, डाॅ. जितेंद्र ठुकराल, नप पूर्व अध्यक्ष यशपाल प्रजापति, चंद्रगुप्त गोयल आदि मौजूद रहे।
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माता ने कहा था, तुम पढ़ो और सफल बनो ः बंडारू
राज्यपाल बंडारू दत्तात्रेय ने कहा कि उनकी माता प्याज बेचती थीं, लेकिन उनको ऐसा नहीं करने दिया। माता ने कहा कि तुम पढ़ो और सफल बनो। इसके बाद वे इस समय राज्यपाल हैं। उन्होंने कहा कि संस्कृत देवभाषा है। यह मन को शांति देने वाली है। हमारा देश आजाद होने के बाद भी देवभाषा को हर जगह नहीं ले जा पाए। अब विद्यार्थी इस कार्य काे पूरा करने के लिए डिग्रियां ले रहे हैं। नई शिक्षा नीति में मातृभाषा को सिखाने का प्रावधान है। चीन में 100 वर्षों से संस्कृत को पढ़ा जा रहा है।
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