कोरोना संकट के समय आपात स्थिति में एनएचएम आउटसोर्सिंग पॉलिसी के तहत रखे गए जिले में 33 कर्मचारियों को स्वास्थ्य विभाग ने मौखिक आदेशों के बाद घर भेज दिया है। गत 31 मार्च को खत्म हुए उनके साथ कांट्रेक्ट के बाद समय अवधि को आगे बढ़ाने की बजाए, इन कर्मचारियों को घर जाने के लिए कह दिया गया है।
लैब टेक्नीशियन संदीप, वीरेंद्र, सूरजभान, अजय, गोबिंद व अन्य कर्मचारियों ने कहा कि कोरोना काल में जब पूरा जिला घरों में था। उस समय मौत के मुंह में उन लोगों ने काम किया। एनएचएम आउटसोसिंग पॉलिसी के तहत जिले में 33 कर्मचारियों को रखा गया था। अब इन कर्मचारियों को कौशल विकास निगम में समायोजित करने या फिर एनएचएम में ही समायोजित करने की बजाए विभागीय अधिकारियों ने 31 मार्च को मौखिक आदेश जारी करते हुए घर जाने के लिए कह दिया है। उनकी मांग है कि उनके काम को देखते हुए उन्हें या तो कौशल विकास निगम में समायोजित किया जाए। या फिर एनएचएम में ही खाली पड़े पदों पर समायोजित किया जाए। इसके लिए रविवार को कर्मचारियों ने विधायक लीला राम व राज्यमंत्री कमलेश ढांडा को ज्ञापन सौंपे।
इन कर्मचारियों ने बताया कि कलायत में एक करोड़ रुपये से भी अधिक की लागत से बनीं लैब को यही कर्मचारी चला रहे हैं। विभाग चाहे तो सभी 33 कर्मचारी इसी लैब में समायोजित हो सकते हैं। यहां कर्मचारी अपनी जान हथेली पर रखकर कोरोना के टेस्ट करते हैं।
सीएमओ डा. जयंत आहुजा ने कहा कि इन कर्मचारियों का 31 मार्च को अनुबंध समाप्त हो गया है। आगे के कार्य को लेकर आला अधिकारियों से बातचीत कर ही फैसला लिया जाएगा।