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Kaithal News: अवशेष प्रबंधन पर 995 किसानों के खातों में पहुंचे 14 करोड़ रुपये

Sat, 31 Jan 2026 01:24 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, कैथल
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सोनू थुआ कैथल। फसल अवशेष प्रबंधन करने वाले जिले के 995 किसानों के बैंक खातों में कृषि विभाग ने 14 करोड़ रुपये की प्रोत्साहन राशि जमा करवा दी है। यह राशि पहली किश्त के रूप में जारी की गई है, जिससे किसानों को आगामी फसलों की तैयारी में आर्थिक संबल मिलेगा। अधिकारियों के अनुसार शेष पात्र किसानों के खातों में भी करीब एक महीने के भीतर राशि ट्रांसफर कर दी जाएगी।
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धान फसल अवशेष प्रबंधन के लिए जिले में कुल 64 हजार किसानों ने विभागीय वेबसाइट पर पंजीकरण कराया था। विभाग की ओर से जिले में कुल करीब 50 करोड़ रुपये की प्रोत्साहन राशि वितरित की जानी है। पंजीकरण के बाद कृषि विभाग की टीमों ने इन-सीटू और एक्स-सीटू माध्यम से फसल अवशेष प्रबंधन करने वाले किसानों का खेतों में जाकर भौतिक सत्यापन किया। सत्यापन में जिले में करीब चार लाख 33 हजार एकड़ भूमि का पंजीकरण सही पाया गया।

करीब दो वर्ष पहले तक बड़ी संख्या में किसान फसल अवशेष का प्रबंधन करने की बजाय खेतों में आग लगा देते थे। इससे न केवल वायु प्रदूषण बढ़ता था, बल्कि भूमि की उर्वरता भी लगातार कमजोर हो रही थी। इसी प्रकार आग लगने की होने वाली घटनाओं पर रोक लगाने के उद्देश्य से सरकार ने फसल अवशेष प्रबंधन पर प्रोत्साहन राशि की योजना शुरू की थी।
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पहले शुरुआत में किसानों को प्रति एकड़ एक हजार रुपये की प्रोत्साहन राशि दी गई, जिससे आग लगाने या लगने की घटनाओं में करीब 50 प्रतिशत तक कमी आई। इसके बावजूद आधे किसान पराली जलाते रहे। इसके बाद किसानों की रुचि को देखते हुए प्रोत्साहन राशि बढ़ाकर 1200 रुपये प्रति एकड़ कर दी गई। सरकार की योजना का सकारात्मक असर यह रहा कि इस सीजन में हरसेक एप के माध्यम से केवल 72 लोकेशन की सूचना मिली, जिनमें विभागीय जांच में महज 11 स्थानों पर आग लगने की घटनाओं की पुष्टि हुई।

गौरतलब है कि पिछले वर्ष जिले में 270 किसानों ने पराली जलाने की घटनाएं की थीं, जिन पर करीब 11 लाख रुपये का जुर्माना लगाया गया था। इस बार आगजनी में आई कमी का असर वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) पर भी देखने को मिला। जहां पिछले वर्ष एक्यूआई का स्तर 450 के आसपास पहुंच गया था, वहीं इस बार यह 200 के आसपास बना रहा। संवाद

10 लाख मीट्रिक

टन फसल अवशेष का हुआ प्रबंधन

कैथल जिले में करीब साढ़े चार लाख एकड़ क्षेत्र में धान की रोपाई की गई थी। इसमें से लगभग 10 लाख मीट्रिक टन फसल अवशेष का सफल प्रबंधन किया गया। इनमें 75 प्रतिशत पीआर किस्म और 25 प्रतिशत बासमती किस्म के अवशेष शामिल रहे। फसल अवशेष प्रबंधन में 800 बेलर मशीनों और 500 सुपर सीडर मशीनों का उपयोग किया गया।

पहली किश्त में 995 किसानों के खातों में 14 करोड़ रुपये की राशि जमा करवाई गई है। शेष किसानों की प्रोत्साहन राशि भी जल्द खातों में डाली जाएगी। आग लगने की घटनाओं को रोकने के लिए प्रशासन की 26 से अधिक टीमें लगातार खेतों का निरीक्षण कर रही थीं। इसके अलावा विभाग की ओर से 500 से अधिक जागरूकता शिविर लगाकर किसानों को फसल अवशेष प्रबंधन के उपाय बताए गए, जिसका सीधा असर पराली जलाने की घटनाओं में कमी के रूप में सामने आया। -जगदीश मलिक, सहायक कृषि अभियंता

10 एकड़ में किया पराली प्रबंधन ः सुभाष

बरसाना निवासी किसान सुभाष ने बताया कि उन्होंने पहली बार पराली

का प्रबंधन किया है। उनके खाते में 7800 रुपये की प्रोत्साहन राशि आई है। इससे पहले वे फसल अवशेष जला देते थे, जिससे अगली फसल की पैदावार कम हो जाती थी। इस बार गेहूं की फसल अच्छी खड़ी है।
चार एकड़ का किया प्रबंधन ः अशोक कुमार

पट्टी अफगान निवासी किसान अशोक कुमार ने बताया कि उन्होंने चार एकड़ में धान की फसल लगाई थी। पराली प्रबंधन के बदले उनके खाते में 4800 रुपये जमा हुए हैं। इससे प्रदूषण भी नहीं हुआ और खेत की उर्वरता भी बनी रही।
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