जींद। यूक्रेन व रूस के बीच जारी युद्ध के बीच भारतीय विद्यार्थियों का वतन वापस आने का सिलसिला जारी है। रोहतक रोड निवासी सिद्धार्थ मंगलवार रात घर लौट आए। सिद्धार्थ 26 फरवरी को युवानो स्थित अपने हॉस्टल से निकले थे और चार दिन के लंबे सफर के बाद घर लौटे।
सिद्धार्थ ने बताया कि रूस व यूक्रेन के बीच तनाव लंबे समय से चल रहा था। ऐसे में यूक्रेन ने पहले ही अपनी सेना को तैनात कर दिया था। इससे वे भी पहले से ही मानसिक रूप से संभावित युद्ध के लिए तैयार थे। 25 फरवरी की रात करीब चार बजे हॉस्टल से कुछ ही दूरी पर स्थित एयरपोर्ट पर पहली बार रूसी जेट द्वारा बम गिराया गया। उन्होंने धमाका तो सुना, लेकिन तब तक हमले का अंदेशा नहीं था। इसके बाद जेट की आवाज सुनी तो सबकुछ साफ हो गया। इसके बाद भी यूक्रेन से निकलने का कोई कार्यक्रम नहीं था, लेकिन परिवार के लोगों से बातचीत करने के बाद निकलने की योजना बनाई। वे 26 फरवरी को युवानो स्थित हॉस्टल से निकले और दिन भर सफर के बाद रोमानिया सीमा पर पहुंचे। वतन वापसी के लिए सबसे बड़ी जंग यूक्रेन सीमा से रोमानिया में प्रवेश करना रहा। इसके बाद किसी प्रकार की दिक्कत नहीं हुई। हॉस्टल से बस से करीब 300 किलोमीटर दूर रोमानिया सीमा पर पहुंचे। इससे दस किलोमीटर पहले जबरदस्त जाम लगा था। इस वजह से यह रास्ता पैदल ही करीब एक घंटे में तय किया गया। सिद्धार्थ के अनुसार सबसे भारी परेशानी रोमानिया की सीमा में प्रवेश पर हुई। इसके लिए करीब 18 घंटे कड़ाके की ठंड में गुजारने पड़े। इसके बाद किस्मत से उन्हें रोमानिया में जल्दी प्रवेश मिल गया। रोमानिया में आने के बाद किसी भी प्रकार की परेशानी नहीं हुई। यहां लोगों को सीमा पार करने के लिए चार-चार दिन तक इंतजार करना पड़ रहा है। सिद्धार्थ के अनुसार रोमानिया में आने के बाद भारत सरकार द्वारा बहुत अच्छे इंतजाम किए गए थे। मंगलवार रात करीब दो बजे घर पहुंचे।
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बेटे के लिए बनाया खीर-चूरमा
सिद्धार्थ की मां राजेश व पिता कृष्ण ने बताया कि युद्ध शुरू होने के बाद हर पल चिंता रहती थी। हालांकि सिद्धार्थ की मां के अनुसार उन्हें भगवान पर पूरा भरोसा था। जैसे ही बेटे के रोमानिया आने की सूचना मिली उनकी खुशी का ठिकाना नहीं रहा। खीर-चूरमा बहुत पसंद इसलिए बेटे के लिए यही बनाया।
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शहर के 16 में से आठ विद्यार्थी लौटे
प्रशासन द्वारा सरकार से मिली सूची के आधार पर उन विद्यार्थियों से संपर्क किया जा रहा है, जो यूक्रेन में थे। इनके परिजनों से भी संपर्क किया गया है। जींद तहसील कार्यालय द्वारा की गई सूची से पता चला है कि 16 में से आठ लोग वापस लौट चुके हैं। कुछ बच्चे अभी दूसरे देशों के रास्ते वापस आ रहे हैं। अभी तक जिले के 72 विद्यार्थियों की पहचान की गई थी। इनमें से 30 युवक-युवतियां यूक्रेन से जींद आ चुके हैं।