जींद। नरवाना की रहने वाली बधिर ताइक्वांडो और एथलीट छवि सिंह ने दिव्यांगता को परास्त कर अंतरराष्ट्रीय खेल जगत में अपनी अलग पहचान बनाते हुए डेफलंपिक्स 2025 में भारत का प्रतिनिधित्व किया था।
जापान में 15 से 26 नवंबर 2025 तक आयोजित डेफलंपिक्स में छवि सिंह का चयन भारतीय दल की सबसे कम उम्र में हुआ था। ताइक्वांडो की पूमसे इंडिविजुअल स्पर्धा में उत्कृष्ट प्रदर्शन किया और पांचवां स्थान प्राप्त किया था।
छवि सिंह महज 14 वर्ष 9 महीने की उम्र में अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिता में भारत का प्रतिनिधित्व करने वाली खिलाड़ी रहीं। जन्मजात बहरापन होने के बावजूद छवि ने कभी भी अपनी कमजोरी को लक्ष्य के आड़े नहीं आने दिया। प्रारंभिक वर्षों में उन्हें संचार से जुड़ी कठिनाइयों का सामना करना पड़ा लेकिन दृढ़ संकल्प और सकारात्मक सोच के बल पर उन्होंने चुनौतियों को चकनाचूर कर दिया।
छवि सिंह का प्रशिक्षण वेलोसिटी ताइक्वांडो अकादमी चंडीगढ़ में हुआ जहां उन्होंने वर्षों तक कठोर अभ्यास और अनुशासन के साथ ताइक्वांडो की बारीकियां सीखीं। उन्होंने ताइक्वांडो को केवल आत्मरक्षा के रूप में नहीं बल्कि क्षमताओं को साबित करने के लिए अपनाया। लगातार अभ्यास और समर्पण के चलते छवि ने राज्य व राष्ट्रीय स्तर की कई प्रतियोगिताओं में सफलता हासिल की।
छवि एक साधारण परिवार से हैं। पिता प्रवीण कुमार भारतीय वायु सेना में सार्जेंट रह चुके हैं और वर्तमान में पंजाब नेशनल बैंक में कार्यरत हैं जबकि मां प्रेमलता गृहिणी हैं। मां का प्रोत्साहन और परिवार का सहयोग छवि के आत्मविश्वास की सबसे बड़ी ताकत है। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी छवि ने भारत का परचम लहराया। उन्होंने पूमसे 21 वाटा ओपन ताइक्वांडो चैंपियनशिप जापान 2025 में स्वर्ण पदक जीतकर देश का नाम रोशन किया था।
शांत, अनुशासित और लक्ष्य के प्रति केंद्रित स्वभाव की छवि सिंह आज न केवल सफल खिलाड़ी हैं बल्कि कई बधिर और दिव्यांग खिलाड़ियों के लिए प्रेरणा का स्रोत भी हैं। उनका सपना है कि भविष्य में और बेहतर प्रदर्शन कर भारत को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर गौरवान्वित करें।