जींद। पिंकी देवी ने संघर्ष, मेहनत और दृढ़ संकल्प के दम पर यह साबित कर दिया कि यदि इरादे मजबूत हों तो कोई भी बाधा रास्ता नहीं रोक सकती। पिंकी का मानना है कि संघर्ष जीवन का हिस्सा है लेकिन निरंतर प्रयास और आत्मविश्वास से हर लक्ष्य को भेदा जा सकता है।
पिंकी ने वर्ष 2013-14 में फेसिंग (तलवारबाजी) खेल की शुरुआत की। उन्होंने जीएसएसएस किठाना स्कूल में कोच दिनेश सैनी के मार्गदर्शन में अभ्यास किया। सीमित संसाधनों के बावजूद उन्होंने मेहनत से खेल में पहचान बनाई। पढ़ाई के साथ-साथ उन्होंने खेल को भी बराबर महत्व दिया। उन्होंने स्नातक की पढ़ाई पूरी करने के बाद बीपीएड और एमपीएड की डिग्री हासिल की।
खेल के क्षेत्र में पिंकी की उपलब्धियां भी उल्लेखनीय रहीं। उन्होंने तीन बार ऑल इंडिया इंटर यूनिवर्सिटी प्रतियोगिता में भाग लेकर अपने जिले और प्रदेश का नाम रोशन किया। हालांकि घर की आर्थिक स्थिति ठीक न होने के कारण उन्हें कुछ समय के लिए खेल से दूरी बनाकर निजी नौकरी करनी पड़ी। इसके साथ ही उन्होंने प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी भी जारी रखी। किसान पिता पाला राम और गृहिणी माता सेवापति की बेटी पिंकी चार भाई-बहन हैं।
मेहनत और लगन का परिणाम यह रहा कि पिंकी ने एचटेट परीक्षा उत्तीर्ण की और मेंस परीक्षा भी पास की। वर्ष 2024 में उन्हें डीपीई (शारीरिक शिक्षा अध्यापिका) के पद पर नियुक्ति मिली। आज पिंकी देवी उन युवाओं के लिए प्रेरणा भी हैं जो सीमित संसाधनों के बावजूद बड़े सपने देखते हैं। पिंकी का मानना है कि संघर्ष जीवन का हिस्सा है लेकिन निरंतर प्रयास और आत्मविश्वास से हर लक्ष्य प्राप्त किया जा सकता है।