जींद। जब पहला यूनिवर्सिटी का चुनाव लड़ा तो गांव में रूक्का पड़ गया था कि जयभगवान की छोरी यूनिवर्सिटी के चुनाव लड़ रही है। उस समय यह बड़ी बात थी कि एक लड़की कॉलेज या यूनिवर्सिटी के चुनाव लड़े। 1994 में पहला चुनाव लड़ा था। मां बहुत नाराज थीं, लेकिन पिता व ताऊ सहमत थे। मां कहती थीं कि लड़की को बिगाड़ोगे। शादी कौन करेगा। दिल्ली की मुख्यमंत्री व हरियाणा की बेटी रेखा गुप्ता अपने पैतृक गांव नंदगढ़ पहुंचीं तो अपनों के बीच खुली किताब हो गईं। उन्होंने अपने राजनीतिक सफर की परेशानी और बाधाएं सभी मंच से सार्वजनिक कीं।
सीएम रेखा गुप्ता बोलीं, आज जिस मंच पर मौजूद हूं, वह आसानी से नहीं मिला। इस सफर तक आने में बड़ी डांट फटकार का सामना करना पड़ा है। समाज में लड़की का राजनीति में आना आसान काम नहीं था। इसके लिए बहुत डांट खानी पड़ी। कई स्तर पर विपरीत परिस्थितियों का सामना भी किया, लेकिन कदम पीछे नहीं किए। बाद में विधायक का चुनाव लड़ा तो हर चुनाव में जुलाना व जींद ही नहीं बल्कि हरियाणा की तरफ से साथ मिला। रिश्तेदार तो कभी गांव के लोगों ने मेरे लिए दिल्ली में वोट मांगे। आज तक आठ चुनाव लड़े हैं। हरियाणा में परिवार व रिश्तेदारियों की मेहनत व सहयोग से यह मंच मिला है।