जींद। अर्बन एस्टेट स्थित अग्रवाल धर्मशाला में रविवार की रात में सृष्टि फाउंडेशन की ओर से गजलों भरी महफिल खोया-खोया चांद कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इसमें मुख्यातिथि नागरिक अस्पताल के सिविल सर्जन डॉ. गोपाल गोयल व मधु गोयल रहे, जबकि डिप्टी एमएस डाॅ. राजेश भोला, उनकी पत्नी सीमा भोला एवं महावीर कंप्यूटर सम्मानित अतिथि रहे। कलाकारों ने अपनी मधुर आवाज से शाम को संगीतमय बना दिया।
सीएमओ डाॅ. गोपाल गोयल ने कहा कि संघर्षशील जीवन में व्यस्तताओं के चलते अपने लिए सुकून के दो पल निकाल पाना बहुत मुश्किल होता है। ऐसे मेें सृष्टि संस्था ने खोया-खोया चांद संगीत महफिल का आयोजन कर सभी को तनावरहित रहने में मदद की है। संगीत सुनना कई मायनों में हमारे स्वास्थ्य को फायदा पहुंचाता है। डिप्टी एमएस डाॅ. राजेश भोला ने कहा कि संगीत सुनने से चिंता, रक्तचाप और दर्द कम हो सकता है। साथ ही नींद की गुणवत्ता, मनोदशा, मानसिक, सतर्कता और याददाश्त में सुधार हो सकता है। सृष्टि फाउंडेशन के संयोजक डाॅ. विवेक सिंगला व प्रवक्ता बलविंद्र सिंह ने बताया कि फाउंडेशन समय-समय पर सामाजिक व संगीतमयी कार्यक्रमों का आयोजन करता है। यह कार्यक्रम पूर्ण रूप से पारिवारिक रहा और कलाकारों ने अपनी आवाज से सबका मन मोह लिया। इस अवसर पर प्रधान सुनील गर्ग, सुनील गोयल, प्रमोद बंसल, आशीष भारद्वाज, डाॅ. प्रियदर्शी, अनिल सिंघल, कुलदीप जिंदल, अनिल मंगला, सुरेंद्र गर्ग, राजेश गर्ग, नितिन सिंगला, केपी सिंह, पीयूष बंसल, संजय सिंगला, डाॅ. मंजू सिंगला, डाॅ. सीमा सिंह, डाॅ. परमिंदर, अंजू सिंगला मौजूद रहीं
कलाकारों ने बिखेरा अपनी आवाज का जादू
खोया-खोया चांद कार्यक्रम में सबसे पहले वीना भारद्वाज ने तू इस कदर मेरी जिंदगी में शामिल है, मनोज जाखड़ ने इस तरह मोहब्बत की शुरुआत कीजिये, मनोज भारद्वाज ने चिट्ठी आई है, वतन से चिट्ठी आई है, श्रुति आमी ने आओ सजा लें आज को, कल का पता नहीं, मयंक ने काश कोई ऐसा मंजर होता, नीरज शर्मा ने मेरे ख्वाबों का हर एक नक्श, शिकायत है शिकायत है, विनय अरोड़ा ने फिर छिड़ी रात बात फूलों की, दूर रहकर ना करो नात करीब आ जाओ, राजकुमार भारद्वाज ने हम तेरे शहर में आए हैं मुसाफिर की तरह सहित कई गजलें सुनाकर श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया।
29जेएनडी01: खोया-खोया चांद कार्यक्रम में गजल की प्रस्तुति देते हुए कलाकार। संवाद
29जेएनडी01: खोया-खोया चांद कार्यक्रम में गजल की प्रस्तुति देते हुए कलाकार। संवाद
29जेएनडी01: खोया-खोया चांद कार्यक्रम में गजल की प्रस्तुति देते हुए कलाकार। संवाद