जुलाना। बेटियां आज किसी भी क्षेत्र में बेटों से पीछे नहीं हैं। वे न केवल अपने माता-पिता का नाम रोशन कर रही हैं बल्कि समाजहित के कार्यों के जरिये दूसरों के लिए प्रेरणा भी बन रही हैं। जैजैवंती गांव की बेटी नरेश मुदगिल ने अपने माता-पिता की स्मृति को संजोने के लिए समाजसेवा का ऐसा रास्ता चुना है जो जरूरतमंद महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने में मदद कर रहा है।
65 वर्षीय नरेश मुदगिल भारतीय खेल प्राधिकरण (साई) में प्रोजेक्ट अधिकारी के पद पर कार्यरत रही हैं। सेवानिवृत्ति के बाद उन्होंने अपनी जमा पूंजी को निजी सुख-सुविधाओं पर खर्च करने के बजाय समाजसेवा के लिए समर्पित करने का निर्णय लिया।
उन्होंने अपने माता-पिता वेदप्रकाश और शांति देवी की स्मृति में गांव में वेद शांति धाम की स्थापना की है। यहां महिलाओं को सिलाई का प्रशिक्षण देकर उन्हें हुनरमंद और आत्मनिर्भर बनाया जा रहा है। इसका उद्देश्य महिलाओं को रोजगार के अवसर उपलब्ध कराकर उन्हें आर्थिक रूप से सशक्त बनाना है।
नरेश मुदगिल का कहना है कि उनके माता-पिता ने उन्हें हमेशा आगे बढ़ने और समाज के लिए कुछ करने की प्रेरणा दी है। जीवन में उन्होंने जो भी उपलब्धियां हासिल कीं उसमें उनके माता-पिता का महत्वपूर्ण योगदान रहा। इसी कारण उन्होंने सेवानिवृत्ति के बाद मिलने वाली राशि को ऐसे कार्य में लगाने का फैसला किया, जिससे जरूरतमंद लोगों को लंबे समय तक लाभ मिलता रहे।
उन्होंने कहा कि महिलाओं को हुनरमंद बनाकर उन्हें अपने पैरों पर खड़ा करना उनके लिए सबसे बड़ी सेवा है। उनका प्रयास है कि वेद शांति धाम के माध्यम से अधिक से अधिक महिलाएं सिलाई का प्रशिक्षण लेकर आत्मनिर्भर बनें।