सफीदों। एक नवंबर 1966 को पंजाब से अलग होकर हरियाणा राज्य की स्थापना हुई। वर्ष 1967 में सफीदों विधानसभा क्षेत्र सीट अस्तित्व में आई, लेकिन तब से लेकर आजतक इस सीट से कोई महिला विधानसभा नहीं पहुंच पाई है। महिला सशक्तीकरण को लेकर राजनीतिक दल बड़ी-बड़ी बात करते हैं, मगर यहां से किसी भी महिला को विधानसभा तक नहीं पहुंचाया। इस सीट से महिलाओं ने भी कहीं न कहीं राजनीति में रुचि कम दिखाई या राजनीतिक दलों ने महिलाओं को टिकट देने में रुचि नहीं दिखाई।
अगर इतिहास पर नजर डालें, तो पाएंगे कि 1967 से लेकर वर्ष 2019 तक केवल चार महिलाएं ही यहां से चुनाव मैदान में उतरी हैं। वर्ष 1996 के चुनाव में जनहित मोर्चा से हेमलता ने चुनाव लड़ा था। उन्हें 4722 वोट मिले थे। इसके अलावा इसी चुनाव में बलजीत कौर ने निर्दलीय प्रत्याशी के तौर पर चुनावी मैदान में उतरकर 93 वोट प्राप्त किए थे। वर्ष 2009 के चुनाव में समाजवादी पार्टी के टिकट पर रानी देवी ने चुनाव लड़ा और 187 मत प्राप्त किए। उसके बाद वर्ष 2014 में भारतीय जनता पार्टी से तत्कालीन विदेश मंत्री सुषमा स्वराज की बहन डॉ. वंदना शर्मा ने भाग्य आजमाया था। उनके चुनाव मैदान में आने से सफीदों का चुनाव रोचक हो गया था। सफीदों हॉट सीट बन गई थी। भाजपा के बड़े-बड़े नेता, कई सेलिब्रिटी व अभिनेता उनके चुनाव प्रचार के लिए आए, लेकिन बात नहीं बनी। डॉ. वंदना शर्मा 27947 मत प्राप्त करके दूसरे स्थान पर रहीं। वे आजाद उम्मीदवार जसबीर देशवाल से मात्र 1422 वोटों से हार गईं थीं। उस वक्त उन्हें यहां पर बाहरी प्रत्याशी होने का दंश झेलना पड़ा। अगर बात वर्तमान 2024 के चुनाव की करें तो इस बार दो महिलाएं सफीदों सीट से अपना भाग्य आजमा रही हैं। आम आदमी पार्टी से निशा देशवाल व इनेलो-बसपा गठबंधन से पिंकी कुंडू चुनावी समर में हैं। देखना यह है कि इस बार इन दोनों महिलाओं में कोई हरियाणा विधानसभा में पहुंच पाती हैं या नहीं।