ट्रांसफार्मर की क्वायल चोरी के मामले में पकड़े गए आरोपियों ने खुलासा किया कि वह पहले तालाबों से मछली चोरी करते थे। लेकिन इससे महज चार से पांच हजार रुपये ही कमाई होती थी। ऐसे में अब वह ट्रांसफार्मर की क्वाइल चोरी करने लगे। इससे एक बार में उनको पंद्रह रुपये बचने लगे। हालांकि अब तीनों जेल की हवा खा रहे हैं।
शुक्रवार को सीआईए टीम सफीदों ने ट्रांसफार्मर चोरी के आरोप में रोहतक के बलियाना निवासी और हाल फिलहाल झज्जर के भूरावास निवासी रामपाल, मनी तथा श्यामलाल को गिरफ्तार किया था। पुलिस रिमांड के दौरान तीनों ने कबूल किया कि वह यह काम पिछले आठ सालों से कर रहे हैं। जींद क्षेत्र में भी उनके खिलाफ इस प्रकार के मामले दर्ज हैं। छह वर्ष पहले भी इनपर ट्रांसफार्मर के उपकरण चोरी के आरोप में मामला दर्ज हुआ था, जिसमें यह तीनों जेल की हवा खा चुके हैं।
रामपाल व मनी की दोस्ती आठ वर्ष पहले हुई थी। दोनों तालाबों से मछली पकड़कर बेचने का काम करते थे। इससे कोई खास कमाई नहीं होती थी। इसके बाद इन्होंने ठेकेदारों द्वारा ठेके पर लिए तालाबों से मछली चोरी करके बेचने का धंधा शुरू किया। आसन, बुढ़ाखेड़ा आदि गांवों से उस समय मछली चोरी की शिकायतें आई थी। मछली चोरी करके यह दोनों चार से पांच हजार रुपये एक बार में कमा लेते। इससे इनका काम नहीं चला तो इन्होंने ट्रांसफार्मर क्वाइल चोरी करने का काम शुरू कर दिया। इसमें एक ही बार में इनको 15 हजार के आसपास रुपये मिल जाते। तीनों ने गांधी गली निवासी श्यामलाल को यह क्वाइल बेचना शुरू कर दिया। अब यह तीनों ही पुलिस के हत्थे चढ़ गए। तीनों को रिमांड के बाद अदालत में पेश किया। अदालत ने तीनों को जेल भेज दिया।