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सीआरएसयू की कार्यकारी परिषद की बैठक में तीन मुख्य मुद्दों पर हुई चर्चा

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जींद। शिक्षकों के बीच चल रहे विवाद को लेकर चौधरी रणबीर सिंह विश्वविद्यालय (सीआरएसयू) की कार्यकारी परिषद की बैठक शुक्रवार को हुई। बैठक में प्रो. संदीप बेरवाल के खिलाफ चल रही जांच पेश की गई, जिसमें उन्हें दोषी पाया गया और चार्जशीट करते हुए दोबार सेवानिवृत्त सत्र न्यायशीध (सेशन जज) से जांच करवाने का फैसला लिया गया।
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परिषद के सदस्यों ने प्रो. बेरवाल को 23 महीने पहले विवि से लिए 5.20 लाख रुपये लौटाने के लिए 15 दिन का समय दिया गया है। साथ ही उन्हें विवि के बारे में बाहरी मंचों पर नहीं बोलने की चेतावनी दी गई है। हालांकि विवाद के दौरान ही प्रो. बेरवाल को निलंबित कर दिया गया था। इसके अलावा परिषद की बैठक में असिस्टेंट प्रो. डॉ. जयबीर सूरा को एसोसिएट प्रोफेसर के पद पर पदोन्नत करने और डॉ. अनिल सैनी की पूर्व सेवा को समायोजित करने पर भी मोहर लगाई गई।
गौरतलब है कि करीब तीन महीने पहले सीआरएसयू में चल रही शिक्षकों की भर्ती के दौरान प्रो. बेरवाल का विवाद हुआ था। इस मामले में प्रो. बेरवाल ने कुलपति प्रो. आरबी सोलंकी व रजिस्ट्रार प्रो.राजेश पूनिया पर मिलीभगत कर गलत नियुक्तियां करने के आरोप लगाए थे। वहीं कुलपति व रजिस्ट्रार का कहना है कि प्रो. बेरवाल अपने किसी जानकार को नियुक्ति दिलवाना चाहते थे। मेरिट पर नियुक्तियां होने पर उन्होंने हंगामा किया। प्रो. बेरवाल पर आरोप हैं कि उन्होंने चयन समिति के सदस्यों के साथ अभद्रता की। इसकी जांच के लिए तीन सदस्यों की कमेटी गठित की गई थी। इसकी रिपोर्ट शुक्रवार को कार्यकारी परिषद के समक्ष खोली गई। विवि के रजिस्ट्रार प्रो. राजेश के अनुसार जांच रिपोर्ट में प्रो. बेरवाल को दोषी पाया गया है। उनको चार्जशीट करते हुए दोबारा मौका देने पर कार्यकारी परिषद में फैसला हुआ है।
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दो साल पहले जारी की गई थी राशि
रजिस्ट्रार प्रोफेसर राजेश पूनिया के अनुसार 2018 के जनवरी माह में विवि का सांस्कृतिक गतिविधियों का दल बाहर गया था। उस समय युवा एंव सांस्कृतिक विभाग के निदेशक होने के नाते उनके खाते में 5.20 लाख रुपये की राशि जारी की गई। हालांकि यह राशि मार्च 2018 में ही जमा करवाई जानी थी, लेकिन ऐसा नहीं हुआ। इसके बाद हालांकि उन्हें नोटिस भेजे गए, लेकिन उन्होंने कहा कि यह राशि उन्होंने दूसरे शिक्षक को दे दी थी, लेकिन विवि के रिकॉर्ड में यह राशि प्रो. बेरवाल को ही जारी की गई है।
क्योंकि मैं विवि का नियमित कर्मचारी था, ऐसे में 5.20 लाख रुपये मुझे जारी किए गए, लेकिन तभी यह राशि कुलपति द्वारा अनुबंध आधार के दूसरे शिक्षक को दिलवा दिए गए थे। कार्यकारी परिषद के अन्य फैसलों की मुझे जानकारी नहीं हैं। जांच कमेटी में जो लोग शामिल हैं, वे पहले आरोपी हैं, ऐसे में इस कमेटी पर मेरा विश्वास नहीं है। विवि की तरफ से कोई जानकारी आने के बाद ही कुछ कहा जा सकता है। - प्रो. संदीप बेरवाल
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