जुलाना। कस्बे में बेसहारा पशुओं की भरमार है। जैसे ही शाम होती है बेसहारा पशु गलियों से निकलकर सडक़ पर आ जाते हैं, जिससे दुकानदारों और वाहन चालकों को काफी परेशानी होती है। कई बार इसकी शिकायत भी दी, लेकिन कोई भी समाधान नहीं हो पाया है। दुकानदारों का कहना है कि बेसहारा पशु कई बार तो सड़क हादसे का कारण बनते हैं।
इसके अलावा पशु कस्बे के लोगों को टक्कर मार कर घायल भी कर चुके हैं। जुलाना कस्बे में लगभग 2000 के करीब बेसहारा पशु घुम रहे हैं। जुलाना में एक गोशाला और नंदीशाला भी है। नंदीशाला में 80 पशुओं की जगह खाली है तो गोशाला में 100 पशुओं की जगह है। नंदी शाला की क्षमता 1400 पशुओं की है। गोशाला में 2400 पशुओं की क्षमता है। नंदी शाला और गोशाला की क्षमता लगभग पूरी हो चुकी है। दुकानदारों की मांग है कि बेसहारा पशुओं को पकड़कर गोशाला में छोड़ा जाए।
जुलाना के बाजार में शाम होते है सड़क पर बेसहारा पशु कब्जा कर लेते हैं और बाजार में आना जाना भी मुश्किल हो जाता है। कई बार इसकी शिकायत भी की लेकिन कोई भी समाधान नहीं हो पाया है।
कपिल, दुकानदार।
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बेसहारा पशुओं के कारण कई बार हादसे भी हो चुके हैं, लेकिन इसके बावजूद प्रशासन नहीं जागा है। कई बार शिकायत भी दी, लेकिन कोरा आश्वासन ही मिला है।
अजय दुकानदार।
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बेसहारा पशुओं को पकड़ने के लिए टेंडर लगाए जा चुके हैं। बेसहारा पशुओं को पकड़कर गोशालाओं में छोड़ा जाएगा। जल्द ही कस्बे के लोगों को आवारा पशुओं से निजात मिलेगी।
-सौरभ जैन, सचिव नपा जुलाना।
08जेएनडी38-कपिल दुकानदार। संवाद
08जेएनडी38-कपिल दुकानदार। संवाद