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शेल्टर होम में रहने वाले मजदूरों को तीन दिन में दो दिन ही मिला खाना

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धर्मकांटे के रूप में ठहरे मजदूर खाना मिलने के बारे में जानकारी देते हुए। - फोटो : Jind
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शेल्टर होम में रोके गए मजदूरों को खाना खिलाने के प्रशासन और समाजसेवी संस्थाओं के दावे को सब्जी मंडी के नजदीक एक धर्मकांटे पर रुके 25 उत्तर प्रदेश के मजदूरों ने नकार दिया है। इससे प्रशासन की प्रवासियों तक भोजन पहुंचाने की व्यवस्था पर बड़ा सवाल खड़ा हो गया है। हालांकि समाजसेवी संस्थाओं और प्रशासन ने हर मजदूर तक शेल्टर्स होम में समय पर खाना पहुंचाने के लिए गई टीमें बनाई हैं। इन टीमों के माध्यम से मजदूरों तक समय पर और उचित मात्रा में खाना नहीं पहुंच रहा है।
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धर्मकांटे के पास रोके गए उत्तर प्रदेश के मजदूर राजू, संतोष तिवारी, भगवान प्रसाद और मंशाराम ने बताया कि प्रशासन उनके पास शनिवार को एक समय का खाना पहुंचाया था। इसके बाद रविवार को भी एक समय का तैयार खाना और कुछ सूखा सामान दिया। इस सूखे सामान में कुछ आटा तो कुछ चने की दाल थी। इसके अलावा कुछ मात्रा में आचार भी दिया। जो राशन प्रशासन उनके पास भेज रहा है वह व्यक्तियों की संख्या के अनुसार बहुत कम होता है। उन्होंने बताया कि एक कमरे में आठ व्यक्तियों को रोका गया, लेकिन उनको मुश्किल से दो किलो आटा व आधा किलो दाल दी गई। यह मात्रा बहुत कम है। रविवार को सूखा राशन के तौर पर दाल व आटा ही दिया गया। इसको तैयार करने के लिए अन्य सामान की भी जरूरत होती है। वह सामान प्रशासन उनको मुहैया नहीं करवा रहा। उन्होंने बताया कि एक सप्ताह से उनके पास काम नहीं होने के कारण उनकी जेब में एक रुपया भी नहीं बचा, जिससे वह सामान खरीद सके। मजदूरों ने बताया कि न तो गैस सिलिंडर उनके पास है और न सूखी लकड़ी। प्रशासन को इसकी भी व्यवस्था करना चाहिए। वे प्रशासन द्वारा दी जा रही व्यवस्था से परेशान हो गए हैं।
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