जींद। चार वर्ष से जींद-सफीदों रोड के चौड़ीकरण के इंतजार में प्रतिदिन हजारों वाहन चालकों को गड्डों से गुजरना पड़ रहा है। बीते विधानसभा सत्र में पंचायत मंत्री कृष्ण लाल पंवार, डिप्टी स्पीकर डॉ. कृष्ण मिड्ढा व सफीदों से विधायक रामकुमार गौतम ने हाईवे की चौड़ीकरण की बात उठाई थी। इसके बावजूद पेड़ों की कटाई व नए पौधे लगाने के लिए वन विभाग के नाम प्रशासन जमीन नाम नहीं करवा पाया।
जींद से सफीदों तक लगभग 188 करोड़ रुपये की राशि से सड़क 10 मीटर चौड़ी होनी है। सफीदों से पानीपत तक फॉर लाइन की सड़क बननी है। अभी तक इस सड़क पर कहीं भी काम शुरू नहीं हो पाया।
इसके अतिरिक्त अब शहर के परशुराम चौक से बाइपास तक सड़क पर गहरे गड्ढे बने हुए हैं। यहां पर वाहनों को रेंग कर निकालना पड़ता है। बाइपास से आगे सड़क कम और गड्डे ज्यादा हैं।
इस सड़क पर रात के समय वाहन चालकों को गड्डों से गुजरने पर हादसों का डर रहता है। सड़क के चौड़ीकरण के इंतजार में न तो इस सड़क का निर्माण करवाया जा रहा। इस पर पेचवर्क करके ही काम चलाया जाता है।
अब बरसात के मौसम में यह सड़क पूरी तरह से टूट चुकी है। सबसे ज्यादा परेशानी तो सड़क पर परशुराम चौक से सफीदों की तरफ एक किलोमीटर तक है।
वन विभाग ने पिछले लगभग दो माह पहले 6500 पेड़ों की कटाई के लिए एनओसी जारी करने का प्रस्ताव अब आधिकारिक रूप से चंडीगढ़ में मुख्यालय के पास भेजा था। इसके चौड़ीकरण की राह में सबसे बड़ी बाधा 6500 हरे-भरे पेड़ हैं। जिन्हें हटाए बिना काम शुरू नहीं हो सकता था।
अनुमति के अभाव में परियोजना अधूरी
चार साल पहले तत्कालीन मुख्यमंत्री ने चौड़ीकरण की घोषणा की थी। वन विभाग की अनुमति के अभाव में यह परियोजना अधूरी है। विभाग ने हरियाली की क्षतिपूर्ति के लिए लगभग 38 एकड़ भूमि की मांग की थी जो अब जिला प्रशासन ने तीन पंचायतों के माध्यम से उपलब्ध तो करवाई है लेकिन यह वन विभाग के नाम नहीं हो पा रही। इसकी फाइल अधिकारियों के कार्यालयों में मंजूरी के इंतजार में हैं।
सबसे खतरनाक सड़कों में शामिल है यह मार्ग
जींद-सफीदों रोड पर सड़क कम और पेचवर्क ज्यादा होने से गड्डे बने हुए हैं। इस पर सबसे ज्यादा खतरा कार व बाइक चालकों को रहता है।
वर्जन
सड़क का निर्माण करवाने से पहले जींद सफीदों रोड पर खड़े हरे भरे पेड़ कटवाए जाने हैं। इसके लिए वन विभाग की मंजूरी जरूरी है। वन विभाग के नाम पेड़ लगवाने के लिए जमीन ट्रांसफर होनी है। इसके लिए प्रक्रिया चली हुई है। जब तक नए पौधे लगाने के लिए जमीन विभाग के नाम नहीं होती। तब तक पेड़ काटने की मंजूरी नहीं दी जा सकती।
पवन ग्रोवर वन मंडल जिला अधिकारी