नरवाना। पुरानी अनाज लोहा मंडी में श्री रामा भारतीय कला केंद्र के तत्वावधान में चल रही रामलीला के तीसरे दिन के मंचन में ताड़का वध, सुबाहु वध, मारीच संग युद्ध और सीता स्वयंवर जैसे रोचक दृश्य प्रस्तुत किए गए। वहीं ताड़का वध से पूरा पंडाल तालियों से गूंज उठा और सीता स्वयंवर के दृश्य ने मोहा मन लिया।
पंडाल खचाखच भरा गया और दर्शकों का उत्साह ऐसा रहा कि कई लोग कुर्सियों पर चढ़कर भी मंचन का आनंद लेते दिखाई दिए। कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में समाजसेवी रमेश गर्ग, नगर परिषद की पूर्व प्रधान प्रतिनिधि सुदेश चोपड़ा और ब्रह्म बैनीवाल मौजूद रहे। मंच संचालन शैलेंद्र मोहन ने बड़े ही रोमांचक और प्रभावशाली अंदाज में किया।
मंचन की शुरुआत उस प्रसंग से हुई जब महर्षि विश्वामित्र राक्षसों के आतंक से त्रस्त होकर राजा दशरथ के दरबार में जाते हैं। वे राम और लक्ष्मण को साथ ले जाने का आग्रह करते हैं। पहले तो दशरथ संकोच करते हैं लेकिन दरबार में मौजूद महर्षि वशिष्ठ के कहने पर दोनों पुत्रों को भेजने के लिए तैयार हो जाते हैं।
इसके बाद विश्वामित्र, राम और लक्ष्मण को लेकर जंगल पहुंचते हैं जहां राक्षसी ताड़का रहती है। राम-लक्ष्मण मिलकर ताड़का का वध कर देते हैं। इसके बाद सुबाहू वध और मारीच संग युद्ध का दृश्य दिखाया गया। मारीच युद्ध में बचकर भाग निकलता है जबकि राम और लक्ष्मण विजयी होते हैं। ताड़का वध का दृश्य इतना जीवंत रहा कि दर्शकों ने तालियों और जयकारों से पूरा पंडाल गूंजा दिया।
इस अवसर पर संरक्षक सुशील कौशिक एडवोकेट, प्रधान भारतभूषण गर्ग, डॉ. विनोद गुप्ता, नप पूर्व प्रधान प्रतिनिधि हंसराज समैण, मंडी प्रधान ईश्वर गोयल, पूर्व उपप्रधान अजमेर श्योकंद, वीरेंद्र नैन, दिलबाग चोपड़ा, सरदार हरचरण सिंह, मन्नू छाबड़ा, महावीर जैन, एडवोकेट राजेश शर्मा, अर्जन गोयल और विनय मित्तल मौजूद रहे।
सीता स्वयंवर का दृश्य बना आकर्षण
मंचन का अगला दृश्य जनकपुरी का रहा। महर्षि विश्वामित्र एक पत्र मिलने के बाद राम-लक्ष्मण को लेकर जनक दरबार पहुंचते हैं। वहां सीता स्वयंवर आयोजित होता है जिसमें देश-विदेश से राजा शामिल होते हैं। शर्त रखी जाती है कि जो शिवधनुष तोड़ेगा वही सीता से विवाह करेगा। मंचन में दिखाया गया कि कई राजा प्रयास करते हैं यहां तक कि रावण भी असफल हो जाता है। अंत में भगवान राम धनुष को सहज ही तोड़ देते हैं और सीता स्वयंवर संपन्न होता है।
कलाकारों ने निभाए दमदार किरदार
राम की भूमिका अमन वर्मा, लक्ष्मण की रामप्रकाश, दशरथ की कुलदीप वर्मा, विश्वामित्र की प्रेम अरोड़ा, वशिष्ठ की पूर्ण चंद, रावण की नरेंद्र कुकरेजा, राजा जनक की ओमप्रकाश उर्फ ओमा, ताड़का की संदीप जाखड़ और एकलव्य ने भूमिका बखूबी निभाई। इसके अलावा मारीच की भूमिका वेद अरोड़ा, बाणासुर की ललित उर्फ काकू और सुबाहु की भूमिका विक्की ने निभाई। कलाकारों के दमदार अभिनय ने दर्शकों का दिल जीत लिया।