09जेएनडी35-भिवानी रोड स्थित राधा स्वामी आश्रम में आयोजित सत्संग में श्रद्धालुओं को प्रवचन सुना
जींद। भिवानी रोड पर स्थित राधा स्वामी आश्रम में सत्संग का आयोजन किया गया। सतगुरु कंवर साहेब महाराज ने कहा कि पतिव्रता स्त्री और शिष्य का ख्याल एक जैसा ही होता है। उन्होंने कहा कि पतिव्रता स्त्री जैसे अपने पति के सिवाय किसी का ख्याल नहीं करती, वैसे ही सच्चे शिष्य को भी सतगुरु के अलावा किसी का ख्याल नहीं आता।
उन्होंने कहा कि यह सत्य है कि इस दुनियादारी में सतगुरु के बिना कोई किसी का मीत नहीं है। उन्होंने कहा कि अपने जीवन को चरित्रवान बनाओ। जीवन हमें इसलिए नहीं मिला था कि हम आगे पीछे की कुछ न सोचें और कुमार्ग पर चलें। हमेशा ख्याल रखें कि वह इस धरती पर क्यों आए हैं। इंसान अपने क्षणिक शौक के लिए दूसरों को कितनी तकलीफ देता है। यह नहीं भूलना चाहिए कि शरीर जंगल की मिट्टी के समान है, जो मिट्टी में ही मिल जाती है। हमारी बुद्धि पर काल और माया का ऐसा जाल गिरा हुआ है, जो दिनों दिन और ज्यादा उलझा रहा है। परमात्मा को पाना है तो कपड़ों को नहीं मन को भक्ति रंगों से रंगो। परमात्मा को बाहर नहीं अंदर तलाश करो। हरि तो सच्चे मन के मीत हैं। उन्होंने कहा कि गुरु भक्ति ही नाम भक्ति है। हाथ से माला जपकर यदि मन भटक रहा है तो माला जपने का क्या लाभ।
गुरु महाराज ने कहा कि जब विचारों की दृढ़ता आती है तो भक्ति आसान हो जाती है। उन्होंने कहा कि कितने राजा, महाराजा, सेठ और साहूकारों के उदाहरण भरे पड़े हैं, जब उन्होंने भक्ति रस को पाने के लिए सारे आनंद छोड़ दिए। यही भक्ति का मूल सत्य है। अगर ये नहीं है तो भक्ति सुलभ नहीं है। सच बोलने वाले को बेशक इस लोक में कष्ट सहना पड़ जाए, परंतु उस लोक में उसके ठाठ ही ठाठ हैं।
महाराज ने कहा कि स्वार्थ और आपाधापी के जीवन ने समाज को दूषित किया है। बुराई एक क्षण में फैलती है। इसलिए बुराई को पनपने ही मत दो। परहित से बढ़कर कोई धर्म नहीं है। उन्होंने कहा कि यदि सोच नकारात्मक होती है तो विनाश का रास्ता खुलता है। यह इंसानी चोला बड़ी मुश्किल से मिला है, इसे नशे में बर्बाद मत करो। मानव रूपी जन्म की महत्ता को समझें। जो समय रहते नहीं चेते वह सदा पछताता है। भगवान के नाम के रसिया बनो ताकि दुनिया के पदार्थ आपको फीके लगने लगें।