17जेएनडी33-पुरानी अनाजमंडी से बेसहारा पशुओं को पकड़ते कर्मचारी। संवाद
जुलाना। कस्बे में बेसहारा पशुओं को पकड़ने का अभियान फिर से शुरू हो गया है। नगरपालिका ने इस अभियान के तहत दो दिन में 70 बेसहारा पशुओं को पकड़कर गोशाला में छोड़ दिया है। नौ सितंबर को अमर उजाला ने इस समस्या को प्रमुखता से उठाया। खबर पर संज्ञान लेते हुए प्रशासन ने आवारा पशुओं को पकड़ने के लिए लिए टेंडर लगाया और अब काम शुरू भी हो गया है।
एक पशु पकड़ने पर 1045 रुपये खर्च किए जाएंगे। इससे लोगों को आवारा पशुओं से राहत मिलेगी। शाम होते ही बेसहारा पशु गलियों से निकलकर सड़क पर आ जाते हैं जिससे दुकानदारों और वाहन चालकों को काफी परेशानियों से होकर गुजरना पड़ता है। कई बार इसकी शिकायत प्रशासन को दी गई लेकिन कोई भी समाधान नही हो पाया। बेसहारा पशुओं के कारण कई बार सड़क हादसे हो चुके हैं।
आवारा पशु बने प्रशासन के लिए चुनौती
जुलाना कस्बे में लगभग दो हजार के करीब आवारा पशु घूम रहे हैं। क्षेत्र में गोशाला और नंदीशाला भी है। उनमें 175 के लगभग अतिरिक्त पशु रखे जा सकते हैं। नंदीशाला की क्षमता 1400 पशुओं की और गोशाला में 2400 पशु रख सकते हैं। अब बेसहारा पशुओं को कहां छोड़ा जाए। नपा प्रशासन के लिए चुनौती बना हुआ है।
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बाजार में शाम होते ही सड़क पर बेसहारा पशु कब्जा कर लेते हैं। उनके कारण लोगों का बाजार में आना जाना भी मुश्किल हो जाता है। आवारा पशुओं के पकड़े जाने से राहत मिलेगी।-सोनू, दुकानदार।
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बेसहारा पशुओं के कारण कई बार हादसे भी हो चुके हैं। इसकी कई बार शिकायत मिल रही थी। अब प्रशासन ने बेसहारा पशुओं को पकड़ने के लिए टेंडर लगाया है और पशु पकड़ने का काम भी शुरू हो गया है। -राहूल, पार्षद, वार्ड-9
वर्जन
बेसहारा पशुओं को पकड़ने का काम शुरू हो चुका है। दो दिन में 70 के करीब बेसहारा पशु पकड़े जा चुके हैं। - सौरभ जैन, सचिव नपा जुलाना