जींद। पिछले करीब एक माह से शहर के प्लाटों व भवनों की ऑनलाइन प्रॉपर्टी आईडी बनाने का काम बंद पड़ा था। यह काम शुरू हो गया है और सोमवार से सामान्य भी हो जाएगा। इससे प्रॉपर्टी आईडी के लिए चक्कर काट रहे लोगों को राहत मिलेगी। इसके चलते लोगों के प्लाटों व भवनों की रजिस्ट्री भी नहीं हो पा रही थी। वहीं सर्वे कंपनी व नगरपरिषद का 75 प्रतिशत रिकॉर्ड मिल गया है।
दरअसल शहर की प्रॉपर्टी की पहचान के लिए निजी कंपनी को टेंडर दिया गया है। कंपनी द्वारा तैयार किए गए रिकॉर्ड व नगरपरिषद के रिकॉर्ड का मिलान नहीं होने के कारण दिक्कत आ रही थी। मौके पर यदि कोई प्लाट 100 गज का है तो वह रिकॉर्ड कम-ज्यादा का था। इसके चलते नगरपरिषद को फीस लेने में भी परेशानी हो रही थी। अब सॉफ्टवेयर में इस रिकॉर्ड को रजिस्ट्री से जोड़ दिया गया है। ऐसे में नगरपरिषद के रिकॉर्ड में भी इस जमीन का क्षेत्रफल उतना ही होगा, जितना रजिस्ट्री में है। 2014 तक के पूरे रिकॉर्ड का मिलान हो गया है और इसके बाद आगे बढ़े शहर की प्रॉपर्टी का मिलान किया जा रहा है।
रिकॉर्ड में थी खामियां
इसके अलावा रिकॉर्ड में कई और भी त्रुटियां थी। इसके तहत किसी खाली प्लाट पर मकान दिखाया गया था तो कहीं रिहायसी प्रॉपर्टी को व्यवसायिक दिखाया गया था। अब ऑनलाइन रिकॉर्ड होने से इससे भी निजात मिलेगी।
57 करोड़ रुपये प्रॉपर्टी कर बकाया
हालांकि नगरपरिषद के अधिकारी पहले सात से आठ करोड़ रुपये प्रॉपर्टी कर ही बकाया मान रहे थे, लेकिन जब नई व्यवस्थाओं के अनुसार इसकी गणना की गई तो यह 57 करोड़ रुपये मिला। ऐसे में अब नगरपरिषद नोटिस भेज कर यह राशि भरवाने की योजना बना रहा है। इसके लिए नोटिस छप चुके हैं। शहर में करीब 80 हजार प्रॉपर्टी हैं। नगरपरिषद सभी को नोटिस भेजेगा। जिन लोगों ने अपना कर भर रखा है, वे रसीद दिखा कर एनओसी ले सकेंगे।
सॉफ्टवेयर में बदलाव के चलते प्रॉपर्टी आईडी का काम बंद था। यह शुरू हो चुका है। सोमवार से काम सामान्य हो जाएगा। हां शहर में करीब 57 करोड़ रुपये प्रॉपर्टी कर बकाया है। इसकी रिकवरी के लिए नोटिस तैयार किए जा रहे हैं।
- संजय बिश्नोई, जिला नगरायुक्त।