जींद। शहर में मिट्टी के चूल्हों की मांग बढ़ गई है। बाजारों में चूल्हों की बिक्री पिछले कुछ दिनों में दोगुनी हो गई है। बाजार में चूल्हे बेचने वालीं दुकानदार सीमा ने बताया कि प्लास्टिक, स्टील व गैस आधारित उपकरणों के बढ़ने से उनकी कमाई प्रभावित हो रही थी। इस मौसम में मिट्टी के बर्तनों, खासकर चूल्हों की मांग ने उनका काम दाेबारा शुरू कर दिया है।
फिलहाल मिट्टी के चूल्हे 100 से लेकर 500 रुपये तक की कीमत में बिक रहे हैं। छोटे चूल्हे 100 से 150 रुपये और बड़े चूल्हों की कीमत 300 से 500 रुपये तक है। सीमा ने बताया कि इन दिनों रोजाना 1,200 से 1,500 रुपये तक के मिट्टी के चूल्हे आसानी से बिक जाते हैं।
उन्होंने कहा कि सर्दी में लोग परंपरागत तरीके से खाना बनाने और गर्माहट पाने के लिए मिट्टी के चूल्हों को अधिक पसंद कर रहे हैं।
शहरवासियों में चूल्हों की मांग बढ़ने के कई कारण हैं। सबसे बड़ा कारण है बढ़ती महंगाई के बीच गैस सिलेंडर के खर्चों से राहत की तलाश। ग्रामीणों ने बताया कि मिट्टी का चूल्हा न केवल किफायती है बल्कि इससे खाना पकाने का स्वाद भी अलग होता है। इसके अलावा ग्रामीण क्षेत्रों और स्लम बस्तियों में आज भी मिट्टी के चूल्हों को प्राथमिकता दी जाती है।
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