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आर्य समाज के बलिदान के बिना देश की आजादी का इतिहास अधूरा : जेपी शूर

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प्राचार्यों को तिरंगा भेंट करते जेपी शूर। संवाद। - फोटो : Jind
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जींद। तिरंगा हमारे देश की शान है। आजादी के अमृत महोत्सव में डीएवी संस्थाएं बढ़-चढ़कर के भाग लेंगी, क्योंकि देश को आजाद कराने के लिए स्वतंत्रता सेनानियों में 75 प्रतिशत लोग आर्य समाज और डीएवी के थे। यह बात डीएवी संस्थाओं के राष्ट्रीय निदेशक जेपी शूर ने रविवार को डीएवी स्कूल में आयोजित डीएवी शिक्षण संस्थाओं के प्राचार्य व प्रभारियों को संबोधित करते हुए कार्यशाला में कही। कार्यशाला में जींद, सफीदों, रतिया, जाखल, टोहाना, फतेहाबाद, पुंडरी व असंध की डीएवी संस्थाओं के प्राचार्यों व शिक्षकों ने भाग लिया।
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जेपी शूर ने पहले नई शिक्षा नीति पर प्राचार्यों को पाठ पढ़ाया। उसके बाद उन्होंने कहा कि आर्य समाज और डीएवी से संबंधित स्वतंत्रता सेनानियों को पाठ्यक्रम में उचित स्थान देने की जरूरत है। आर्य समाज के बलिदान के बिना देश की आजादी का इतिहास अधूरा है। सरदार भगत सिंह और उनका संपूर्ण परिवार आर्य समाज से संबंध रखता था। लाला लाजपत राय आर्य समाज को अपनी मां कहते थे। भाई परमानंद, वीर सावरकर, पंडित राम प्रसाद बिस्मिल इत्यादि बहुत से क्रांतिकारियों ने आर्य समाज की शिक्षा दीक्षा लेकर देश के स्वतंत्रता संग्राम में भाग लिया। डीएवी संस्थाओं के क्षेत्रीय निदेशक डॉ. धर्मदेव विद्यार्थी ने कहा कि देश में 900 से अधिक डीएवी संस्थाएं और उनमें पढने वाले 80 लाख विद्यार्थी अपने घरों पर तिरंगा फहराएंगे। उन्होंने डीएवी स्कूल से इसका शुभारंभ किया। उन्होंने सभी प्राचार्यों को तिरंगा भेंट किया।
इस मौके पर रश्मि विद्यार्थी, राजेश कुमार, नीरज शर्मा जाखल, साधना बक्शी पुंडरी, सुखपाल सिंह असंध, माला उपाध्याय टोहाना, मोनिका खन्ना रतिया व सुनीता मदान फतेहाबाद ने विशेष भाग लिया। सभी ने तिरंगा अभियान में भाग लेने का संकल्प किया।
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