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सरकार की स्कूल और आंगनबाड़ी केंद्रों में दूध पहुंचाने की योजना 30 हजार दुग्ध उत्पादकों के गले की फांस बनी

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वीटा प्लांट में दूध की अदायगी की मांग को लेकर पहुंचे समिति के सदस्य। संवाद - फोटो : Jind
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प्रदेश सरकार की आंगनबाड़ी केंद्रों और स्कूलों में दूध सप्लाई करने की योजना अब पिछले दो माह से जींद, फतेहाबाद व हिसार के लगभग 30 हजार दुग्ध उत्पादकों के गले की फांस बन गई है। इसके तहत 762 समितियों का 28 करोड़ रुपये दो महीने से वीटा की तरफ बकाया है।
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जींद वीटा मिल्क प्लांट से जींद समेत कई अन्य जिलों में सरकार की इस योजना के तहत दूध की सप्लाई होती है। इस दूध की सप्लाई का प्रदेश सरकार को वीटा मिल्क प्लांट में भुगतान करना होता है। प्रदेश सरकार ने वीटा को इस दूध की अदायगी नहीं की, जिसकी वजह से वीटा के पास दुग्ध सप्लायरों के पास पैसे देने का बजट नहीं है।
सोमवार को वीटा मिल्क प्लांट में 100 से ज्यादा समितियों के सदस्य रुकी हुई राशि की मांग को लेकर एकत्रित हुए। उन्होंने वीटा के अधिकारियों से भुगतान को लेकर बात की तो उन्होंने कहा कि सरकार द्वारा पैसा भेजने के बाद उनके खातों में डाल दिया जाएगा। जींद, हिसार और फतेहाबाद में वीटा की 762 समितियां हैं। इन समितियों द्वारा 11 अक्तूबर से अब तक वीटा को सप्लाई किए गए दूध का एक पैसा भी नहीं आया है। दो महीने से ज्यादा समय बीतने के बाद भी इनकी सुनवाई नहीं हुई। इससे नाराज समिति के सदस्यों ने वीटा प्लांट में एकत्रित होकर वीटा प्रशासन और जिला प्रशासन को एक जनवरी तक का अल्टीमेटम दिया है। उन्होंने कहा कि अगर एक जनवरी तक उनके पैसे नहीं दिए गए तो दो जनवरी को वीटा मिल्क प्लांट के सामने रोड जाम करेंगे।
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दुग्ध उत्पादक को 10 दिन में देने होते हैं पैसे
दुग्ध उत्पादक को समितियों द्वारा दस दिन में पैसे देने होते हैं। इससे दुग्ध उत्पादक को पशुओं के लिए खल व बिनौला लाना होता है, ताकि उनका पशु निरंतर दूध देता रहे। प्रतिदिन दुग्ध उत्पादक उनसे पैसे की मांग करते हैं। इसके चलते उनको ज्यादा परेशानी का सामना करना पड़ता है।
महिपाल ढिल्लों।
भुगतान नहीं होने से बंद हो सकता है दूध
अगर समय पर भुगतान नहीं होगा तो वीटा को मिलने वाले दूध की सप्लाई बंद हो सकती है। उत्पादक को दस दिन में पैसा मिलने के कारण ही वीटा को दूसरी मिल्क कंपनियों की अपेक्षा दूध दिया जाता है। अब लगातार छह पेमेंट नहीं मिलना उत्पादकों के लिए बड़ी बात है। वह उत्पादकों के साथ खड़े हैं। अगर एक जनवरी तक उनकी पेमेंट नहीं हुई तो वह समिति के सदस्यों और उत्पादकों के साथ रोड जाम करने से भी पीछे नहीं हटेंगे।
सुशील कुमार, चेयरमैन वीटा मिल्क प्लांट।
प्रतिदिन डेढ़ लाख लीटर दूध सप्लाई होता है
जींद, हिसार और फतेहाबाद जिलों से प्रतिदिन डेढ़ लाख लीटर दूध सप्लाई किया जाता है। इसमें से जरूरत के अनुसार दूध, पनीर, घी व अन्य उत्पाद मार्केट में भेजे जाते हैं। शेष दूध का पाउडर बनाकर स्टोर किया जाता है। मिड-डे मील और आंगनबाड़ी केंद्रों में मिल्क पाउडर सप्लाई होता है।
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