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Jind News: कोर्ट ने 6 साल पहले हक में दिया फैसला, सिस्टम आज तक नहीं दिला पाया मकान

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03जेएनडी04-एसडीएम कोर्ट के खिलाफ हाईकोर्ट को दी शिकायत दिखाते बुजुर्ग रामनिवास। संवाद
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जींद। ऐसे बुजुर्ग जिन्हें घर से बेघर कर दिया जाता है या उनकी जमीन हड़प ली जाती है, उन्हें न्याय दिलाने के लिए एसडीएम कोर्ट को ट्रिब्यूनल (न्यायिक अदालत) बनाया गया है। इस ट्रिब्यूनल ने विकास नगर निवासी रामनिवास के हक में छह साल पहले फैसला सुनाया था। लेकिन, उन्हें आज तक मकान का कब्जा नहीं मिल सका है। पीड़ित रामनिवास इस उम्र में किराये पर दिन गुजार रहे हैं।
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रामनिवास ने बताया कि दो बेटों और बहुओं ने छह साल पहले उन्हें घर से निकाल दिया था। ट्रिब्यूनल कोर्ट ने साल 2020 में उनके हक में फैसला सुनाया। कोर्ट ने पुलिस को मकान पर कब्जा दिलाने के आदेश दिए, लेकिन आज तक उन्हें मकान नहीं मिल पाया है।
साल 2023 में उन्होंने पुन: कब्जा दिलाने की गुहार लगाई थी, तब ट्रिब्यूनल कोर्ट ने जींद शहर थाना प्रभारी को आरोपियों की गिरफ्तारी के आदेश दिए थे, लेकिन प्रभारी ने कोई कार्रवाई नहीं की। इसके बाद कोर्ट ने प्रभारी के खिलाफ कार्रवाई के लिए एसपी को आदेश दिए तो एसपी ने भी कोई जवाब नहीं दिया। वहीं, जब कोर्ट ने तहसीलदार को बुजुर्ग के बेटों को प्रॉपर्टी का ब्योरा देने के लिए नोटिस भेजकर कार्रवाई के लिए कहा, ताकि जमीन कुर्क की जा सके तो तहसीलदार ने भी उसे गंभीरता से नहीं लिया।
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एसडीएम ने हड़पी जमीन की कुर्की के दिए आदेश
वीरवार को इस केस की कोर्ट में सुनवाई हुई। इसमें आरोपी पक्ष से कोई नहीं पहुंचा। उनकी तरफ से वकील ही पहुंचे। करीब आधा घंटा सुनवाई के बाद एसडीएम सत्यवान मान ने मौखिक रूप से हड़पी गई जमीन की कुर्की करवाने के लिए कहा।
कर्ज होने पर नेपाल भाग चुके बेटा और बहू
रामनिवास ने कहा है कि साल 2011 में उसका एक बेटा और बहू कर्ज अधिक होने पर नेपाल भाग गए थे। आरोप है कि वहां भी उन्होंने 20-25 करोड़ की धोखाधड़ी कर ली थी। फर्जी तरीके से नागरिकता लेने पर नेपाल पुलिस ने सतीश को गिरफ्तार कर लिया था, जबकि बहू गिरफ्तारी के डर से भारत लौट आई थी। बाद में बीमारी के चलते उसके बेटे की जेल में ही मौत हो गई थी।
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