संवाद न्यूज एजेंसी
जींद। सेना दिवस के अवसर पर पूर्व सैनिकों व इंडियन वेटरन ऑर्गेनाइजेशन की ओर से अमर उजाला के साथ विशेष संवाद कार्यक्रम हुआ। जिलाध्यक्ष कैप्टन राजेंद्र सिंह रेढू ने पूर्व सैनिकों, उनके परिवारों और शहीदों के सम्मान से जुड़े अहम मुद्दों को प्रमुखता से उठाया।
उन्होंनें कहा कि देश की रक्षा में अपना सर्वस्व न्योछावर करने वाले सैनिकों और शहीदों को आज भी कई बुनियादी अधिकारों और सम्मान के लिए संघर्ष करना पड़ रहा है।
जिलाध्यक्ष कैप्टन ने बताया कि जिले में 26 शहीदों की प्रतिमाएं स्थापित किए जाने की लंबे समय से मांग की जा रही है। इन प्रतिमाओं का इंतजार न केवल पूर्व सैनिकों बल्कि शहीदों के परिजनों को भी है। शहीदों की प्रतिमाएं नई पीढ़ी को देशभक्ति और बलिदान की प्रेरणा देती हैं लेकिन प्रशासन की उदासीनता के कारण मांग वर्षों से अधर में लटकी हुई है।
कैबिनेट सेक्रेटरी की ओर से सैनिकों के साथ सभी सरकारी कार्यालयों और सार्वजनिक स्थलों पर सम्मानजनक व्यवहार करने के निर्देश जारी किए गए हैं। फिर भी सैनिकों को सामान्य नागरिकों की तरह लाइनों में खड़ा होना पड़ता है।
संवाद कार्यक्रम में स्वतंत्रता दिवस और गणतंत्र दिवस समारोहों में सैनिकों और शहीदों की वीरांगनाओं की अनदेखी का मुद्दा भी उठा। पूर्व सैनिकों ने कहा कि इन राष्ट्रीय आयोजनों में प्रशासन सैनिक परिवारों के लिए बैठने तक की उचित व्यवस्था नहीं करता जबकि राजनीतिक दलों के लोगों को प्राथमिकता दी जाती है। यह देश की सेवा करने वालों के साथ अन्याय है।
पूर्व सैनिकों ने प्रदेश के टोल नाकों पर सैनिकों से टोल वसूली का विरोध किया। उन्होंने सरकार से इस व्यवस्था को तुरंत समाप्त करने की मांग की।
अग्निवीरों को विवाह न करने संबंधी फरमान को वापस लेने की मांग की। पूर्व सैनिक रमेश कुमार जागलान, कैप्टन रणधीर चहल, अर्जुन अवार्डी चांदराम, रमेश कुमार, धर्मपाल ढुल, धर्मपाल अहलावत व अन्य मौजूद रहे।