जींद। एडिशनल सेशन जज की अदालत ने दुष्कर्म के मामले में आरोपी को सबूतों के अभाव में बरी कर दिया है। यह मामला साल 2022 से अदालत में चल रहा था। अदालत के समक्ष पीड़िता ने यौन संबंधित जानकारी सही नहीं बताई। इसी को लेकर अदालत ने आरोपी को बरी कर दिया।
अदालत में चले अभियोग के अनुसार 29 जून 2022 को पुलिस एफआईआर में बताया था कि उसके दो बच्चे हैं। आरोप लगाया कि वह और आरोपी मनमोहन चार साल से एक-दूसरे से बात करते थे। उसने यह भी बताया कि उसके इस रिश्ते के कारण ही मनमोहन ने अपनी पत्नी को गोली मारने की कोशिश की थी ताकि वह उसके साथ रह सके।
मामले में आरोपी मनमोहन के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर पुलिस ने जेल भेज दिया था। 22 अप्रैल को मनमोहन की जमानत करवाई। फिर उसे मनमोहन के घर में रहने के लिए मजबूर किया लेकिन बाद में उसे बाहर निकाल दिया गया।
मनमोहन ने बाद में एक कमरा किराए पर लिया और उसे आश्वासन दिया कि वह उसे अपनी पत्नी के रूप में रखेगा और उसकी सभी जरूरतों का भी ख्याल रखेगा। शादी के इसी झूठे बहाने से उसने बार-बार उसके साथ दुष्कर्म किया लेकिन बाद में उसने शादी करने से मना कर दिया।
24 जून को आरोपी ने उसे बुलाया गया और उसे गंभीर परिणामों की धमकी दी। मामले में पुलिस ने आरोपी के खिलाफ दुष्कर्म करने व धमकी देने के आरोप में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू कर गिरफ्तार कर लिया था। इस दौरान पुलिस ने आरोपी के खिलाफ सबूत जुटाकर अदालत में पेश किए लेकिन पीड़िता ने आरोपी के साथ रहने की समय और तारीख सही नहीं बताई।
उसने यौन संबंध की घटना के बारे में भी सही जानकारी नहीं दी। इन्हीं बातों को लेकर एडिशनल सेशन जज शिफा की अदालत ने आरोपी को बरी कर दिया।