आर्य समाज नरवाना के सत्संग में वैदिक संस्कृति, श्रम और मातृभाषा पर दिया जोर
संवाद न्यूज एजेंसी
नरवाना। आर्य समाज नरवाना में रविवार को वैदिक परंपराओं के अनुरूप हवन कर पर्यावरण शुद्धि व समृद्धि की कामना की गई। सत्संग के दौरान भजन व गीतों से ईश्वर स्तुति, प्रार्थना, उपासना और आराधना की गई। महर्षि दयानंद सरस्वती के समाज सुधार संबंधी कार्यों का स्मरण किया गया।
प्रधान चंद्रकांत आर्य ने प्राचीन वैदिक संस्कृति में सत्यनिष्ठा के साथ स्वाभिमान पूर्वक आजीविका कमाने पर बल दिया है। उन्होंने चौधरी छोटूराम के जीवन का उल्लेख करते हुए कहा कि भारत कृषि प्रधान राष्ट्र रहा है जहां खेती-बाड़ी और कुटीर उद्योगों ने समाज को आत्मनिर्भर बनाया। वर्तमान मैकाले शिक्षा पद्धति पर कटाक्ष करते हुए उन्होंने कहा कि इससे श्रम से विमुख और परजीवी मानसिकता पनप रही है, जिससे युवा वर्ग नशाखोरी की ओर बढ़ रहा है।
जयपाल सिंह आर्य ने कहा कि हिंदी भारत की आत्मा है और महर्षि दयानंद ने इसे राष्ट्रीय भाषा माना था। उन्होंने मातृभाषा और संस्कृत के महत्व पर प्रकाश डालते हुए विश्व हिंदी दिवस के अवसर पर सभी से हिंदी के अधिक प्रयोग का आह्वान किया।
मिथिलेश शास्त्री ने वैदिक परंपराओं में निस्वार्थ समाज सेवा को प्रत्येक व्यक्ति का दायित्व बताया और सर्दी के मौसम में स्वास्थ्य संबंधी सुझाव दिए। इस अवसर पर धर्मपाल, प्रताप सिंह, यशपाल, वेदपाल आर्य, रामकुमार आर्य, संजीव, बलबीर सिंह सहित अनेक आर्यजन उपस्थित रहे।