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Jind News: बागवानी से हर साल 20 लाख रुपये बचत कर रहे सुरेंद्र श्योकंद

Mon, 12 Jan 2026 12:10 AM IST
रोहतक ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, जींद
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11जेएनडी33: खेत में अमरूद के बाग में अमरूद दिखाते हुए युवा किसान सुरेंद्र श्योकंद। संवाद
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जींद। जिले के सफा खेड़ी गांव के प्रगतिशील किसान सुरेंद्र श्योकंद युवाओं के लिए प्रेरणा बनकर उभरे हैं। जहां एक ओर पानी की कमी और नमकीन भूजल खेती के लिए बड़ी चुनौती है। वहीं सुरेंद्र श्योकंद ने समस्या को नवाचार और दूरदर्शिता से अवसर में बदल दिया।
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खेत में पानी की किल्लत हुई तो उन्होंने हार मानने के बजाय बागवानी विभाग से अनुदान लेकर खेत में बड़ा टैंक बनवाया और आधुनिक तकनीक को अपनाकर खेती की दिशा ही बदल दी। सुरेंद्र श्योकंद बताते हैं कि उनके खेत में ट्यूबवेल का पानी नमकीन है। इससे पारंपरिक खेती करना मुश्किल हो रहा था। फसलों की पैदावार और गुणवत्ता लगातार प्रभावित हो रही थी। ऐसे में उन्होंने बागवानी की ओर रुख किया।
सरकारी योजनाओं की जानकारी लेकर उन्होंने अनुदान के तहत पानी का स्टोरेज टैंक बनवाया। नहर में जब भी पानी आता है, वह एक बार टैंक को भर लेते हैं और फिर जरूरत के अनुसार पूरे खेत में ड्रिप सिंचाई के माध्यम से पानी का उपयोग करते हैं। इससे पानी की बर्बादी भी रुकी और फसलों को नियंत्रित मात्रा में सिंचाई मिलने लगी।
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सुरेंद्र श्योकंद ने कुल सात एकड़ भूमि में आधुनिक बागवानी मॉडल विकसित किया है। इसमें से तीन एकड़ में नेट हाउस लगाए गए हैं जबकि चार एकड़ क्षेत्र में बाग लगाए हुए हैं। इसके अलावा वह गोभी, मटर, पालक और मूली जैसी सब्जियों के हाईब्रिड बीज का उत्पादन कर रहे हैं। हाईब्रिड सीड प्रोडक्शन का काम शुरू कर उन्होंने अपनी आय में वृद्धि की है। गुणवत्तापूर्ण बीजों की मांग बाजार में लगातार बढ़ रही है, जिसका सीधा लाभ उन्हें मिल रहा है।
बागवानी और आधुनिक सिंचाई तकनीक अपनाने से सुरेंद्र श्योकंद सालाना करीब 20 लाख रुपये की बचत कर रहे हैं। पहले जहां पानी, खाद और फसल खराब होने का नुकसान झेलना पड़ता था अब वही खर्च नियंत्रित हो गया है और मुनाफा बढ़ गया है। इतना ही नहीं उन्होंने अपने खेतों में आठ मजदूरों को स्थाई रोजगार भी दिया है जिससे ग्रामीण स्तर पर रोजगार सृजन में भी योगदान मिल रहा है।
इंसेट
सफलता की सीढ़ी बनाया जा सकता है
सुरेंद्र श्योकंद का कहना है कि आज का युवा यदि खेती को परंपरागत नजरिए से बाहर निकालकर वैज्ञानिक और व्यावसायिक रूप में अपनाएं तो खेती घाटे का सौदा नहीं बल्कि मुनाफे का मजबूत साधन बन सकती है। युवा दिवस पर उनकी यह सफलता कहानी यह संदेश देती है कि कठिनाइयां चाहे कितनी भी बड़ी हों सही सोच, मेहनत और तकनीक से उन्हें सफलता की सीढ़ी बनाया जा सकता है।
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