जींद। शहर की सड़कों के चौक-चौराहों पर बेसहारा पशुओं ने डेरा जमा लिया है। ऐसे मेें राहगीरों को हादसे का डर बना रहता है। शहरी क्षेत्रों की तरह ग्रामीण क्षेत्रों में भी बेसहारा गोवंश से लोगों को काफी परेशानी होती है। फिलहाल जिले में तीन हजार के लगभग बेसहारा गोवंश घूम रहे हैं। इसको लेकर डीसी ने बुधवार को अधिकारियों की बैठक लेकर गोवंश पकड़ो अभियान में तेजी लाने के निर्देश दिए हैं जिससे लोगों को गोवंश से राहत मिल सके।
शहर में नरवाना, कैथल, हांसी, बरवाला, असंध, सफीदों रोड और नेशनल हाईवे सहित अन्य सार्वजनिक स्थानों पर दिनभर आवारा गोवंश मंडराते रहते हैं। इनमें से कई तो वाहनों की चपेट में आ जाते हैं जिससे वाहन चालकों और पशुओं की जान को आफत बनी हुई है।
यह स्थिति रात को ज्यादा गंभीर होती है क्योंकि जिन पशुओं का रंग काला होता है वे रात में दिखाई नहीं देते हैं। इससे चालक कई बार दुर्घटनाग्रस्त हो जाता है। नगरपरिषद भी इस समस्या की तरफ गंभीर दिखाई नहीं दे रहा है। इसके चलते शहरवासियों को गोवंश के आतंक से निजात नहीं दिला पा रही है।
रात में हादसों का बना डर
बेसहारा गोवंश रात के समय सड़कों के बीच में बैठे मिलते हैं। कई जगह कम रोशनी होने की वजह से वाहन चालक को पशु सड़कों पर बैठे नहीं दिखते हैं। इससे हादसों का डर बना रहता है।
44 गोवंशों को भेज चुके गोशाला
जिले में नगर परिषद और अन्य सामाजिक संस्थाएं गोवंश को पकड़कर गोशालाओं में छोड़ रही हैं। हालांकि अभी कई गोशालाओं में जगह नहीं है। वहीं कुछ गोशाला संचालक गाय को तो ले रहे हैं लेकिन सांड को लेने के लिए कोई तैयार नहीं है। इस मामले को लेकर बुधवार को डीसी ने अधिकारियों, गोशाला संचालकों और अन्य सामाजिक संगठन सदस्यों की बैठक ली। जिले में अब तक कुल 444 गोवंश पकड़कर गोशाला भेजे जा चुके हैं।
वर्जन
जिले में गोवंश पकड़ो अभियान में तेजी लाई जाएगी। इसको लेकर अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं। अब अभियान चलाकर गोवंश को पकड़कर गोशाला छोड़ा जाएगा।
मोहम्मद इमरान रजा, डीसी जींद