जींद। नागरिक अस्पताल के नए भवन में नवजात शिशुओं के लिए जल्द ही स्पेशल न्यूबॉर्न केयर यूनिट (एसएनसीयू) शुरू होने की उम्मीद है। भवन का काम पूरा हो चुका है। अगले सप्ताह लोक निर्माण विभाग भवन को स्वास्थ्य विभाग को हैंडओवर करेगा।
फिलहाल खिड़कियों और दरवाजों पर शीशे लगाने का काम चल रहा है। इसके बाद स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी वार्ड का निरीक्षण करेंगे और एसएनसीयू को शुरू किया जाएगा।
नई बिल्डिंग में एसएनसीयू शुरू होने से प्रसव के बाद नवजात को उपचार के लिए दूसरी बिल्डिंग में ले जाने की जरूरत नहीं पड़ेगी। वर्तमान में महिला और बच्चों की ओपीडी, जांच और ऑपरेशन की सुविधा नई बिल्डिंग में ही उपलब्ध है। ऐसे में जन्म के तुरंत बाद किसी नवजात को पीलिया, सांस लेने में परेशानी या अन्य स्वास्थ्य समस्या होने पर उसे सीधे नई बिल्डिंग स्थित एसएनसीयू में भर्ती किया जा सकेगा।
करीब साढ़े तीन माह पहले एसएनसीयू को नई बिल्डिंग में शिफ्ट करने की तैयारियां शुरू की गई थीं। वार्ड में आवश्यक पार्टिशन और ब्लॉक तैयार किए जा चुके हैं। कुछ सिविल कार्य और मशीनों की स्थापना का काम बाकी है। अस्पताल में नवजातों के लिए फिलहाल 19 बेड का एसएनसीयू है जहां गंभीर और विशेष निगरानी की जरूरत वाले बच्चों का इलाज किया जाता है। नवजातों के इलाज में इस्तेमाल होने वाली दवाओं का स्टॉक भी अलग से रखा जाता है।
महिलाओं के लिए अलग कमरा भी तैयार किया गया
नई बिल्डिंग में पहले ही महिला ओपीडी को शिफ्ट किया जा चुका है। नीचे के ब्लॉक में छोटे बच्चों की जांच होती है जबकि ऑपरेशन थिएटर भी इसी भवन में है। नेत्र जांच वार्ड को भी प्रथम तल पर स्थानांतरित किया जा चुका है। महिलाओं को दी जाने वाली दवाओं के लिए अलग कमरा भी तैयार किया गया है।
नवजात को पुरानी बिल्डिंग तक ले जाने की परेशानी होगी खत्म
वर्तमान व्यवस्था में प्रसव के बाद नवजात को स्वास्थ्य संबंधी परेशानी होने पर पुरानी बिल्डिंग में स्थित एसएनसीयू तक ले जाना पड़ता है। मौसम खराब होने या ठंडी-गर्म हवा के दौरान नवजात को एक भवन से दूसरे भवन तक ले जाने में संक्रमण और तापमान संबंधी जोखिम रहता है। नई बिल्डिंग में एसएनसीयू शुरू होने के बाद यह परेशानी काफी हद तक दूर हो जाएगी।
वर्जन
एसएनसीयू को नई बिल्डिंग में शिफ्ट करने का काम अंतिम चरण में है। शीशे लगाने और कुछ छोटे सिविल कार्य बाकी हैं। काम पूरा होते ही निरीक्षण के बाद एसएनसीयू शुरू कर दिया जाएगा।
-डॉ. रघुबीर पूनिया, पीएमओ नागरिक अस्पताल जींद।