बेटियों ने एक बार फिर बता दिया भी वे किसी से कम नहीं हैं। रविवार को आए हरियाणा शिक्षा बोर्ड 10वी के परीक्षा परिणाम में जुलाना के रोहिला स्कूल की छात्रा शिप्रा ने 98 प्रतिशत अंक प्राप्त जिले में पहला स्थान हासिल किया है। हालांकि शिक्षा बोर्ड द्वारा घोषित दसवीं कक्षा का रिजल्ट जिले के लिए निराशाजनक रहा है। जिले के कुल 47.63 प्रतिशत विद्यार्थी ही इसमें पास हुए हैं। खराब परीक्षा परिणाम से बच्चों और अभिभावकाें में निराशा है। जिले के निराश जनक परीक्षा परिणाम के लिए हरियाणा विद्यालय अध्यापक संघ ने प्रदेश सरकार व शिक्षा विभाग को दोषी ठहराया है। जिले में इस बार 20489 विद्यार्थियों ने हरियाणा बोर्ड की 10वीं कक्षा की परीक्षा दी थी। इनमें से केवल 9759 विद्यार्थी ही परीक्षा में उत्तीर्ण हुए हैं। वहीं 10730 विद्यार्थियों को रि-अपीयर आई है, जिसमें से 6216 विद्यार्थी एक विषय में फेल हुए हैं, वहीं 4308 विद्यार्थी दो या दो से अधिक विषयों में फेल हुए हैं।
रोहिला स्कूल के 32 विद्यार्थी मेरिट में
रोहिला पब्लिक स्कूल जुलाना की छात्रा कीर्ति लाठर ने 500 में से 466 और अंजलि रोहिला ने 460 अंक प्राप्त कर विद्यालय में क्रमश: द्वितीय व तृतीय स्थान प्राप्त किया है। स्कूल के कुल 77 विद्यार्थियों में से 32 ने मेरिट व 22 ने प्रथम श्रेणी हासिल की है।
खराब परीक्षा परिणाम के लिए सरकार व शिक्षा विभाग की गलत नीतियां हैं जिम्मेदार
सरकारी स्कूलों में मुख्य विषयों के खाली पद रिक्त पड़े हैं। गेस्ट टीचर्स को भी रिलीव कर दिया गया। गणित का टीचर साइंस पढ़ा रहा है और सामाजिक विज्ञान का टीचर अंग्रेजी। अध्यापकों पर वर्कलोड ज्यादा है और गैर शैक्षणिक कार्यों का भी बोझ है। पिछले साल खराब परीक्षा परिणाम पर प्रदेश सरकार ने शिक्षा नीति में खामियां होने की बात स्वीकार करते हुए सुधार की बात कही थी, लेकिन कोई कदम नहीं उठाया गया।
भूप सिंह वर्मा, जिला प्रेस सचिव
हरियाणा विद्यालय अध्यापक संघ।
एम्स में सर्जन बनना चाहती है शिप्रा
जुलाना के रोहिला स्कूल जुलाना की छात्रा शिप्रा सिंह ने 500 में से 490 अंक प्राप्त करके इतिहास रचा है। मुख्याध्यापिका निर्मल रोहिला के अनुसार शिप्रा उनके विद्यालय की केजी कक्षा से ही नियमित छात्रा रही है और हर कक्षा में अव्वल आती रही है। शिप्रा ने अंग्रेजी में 100, गणित में 100 व फिजिकल एजूकेशन में 100 अंक प्राप्त कर यह सफलता अर्जित की है। शिप्रा के अनुसार अपनी सफलता का श्रेय शिक्षकों व अभिभावकों को जाता है, लेकिन चाचू ने जो स्टडी मैटीरियल दिल्ली, हरियाणा, मेरठ घूम-घूम कर इकठ्ठा किया, उसके लिए मैं उन्हें थैक्स करना चाहती हूं। भविष्य में शिप्रा एम्स में सर्जन बनने के अपने सपने को साकार होता देखना चाहती है।