संवाद न्यूज एजेंसी
जींद। चंद्रयान-3 की सफलता में जिले के छात्तर गांव के निवासी वैज्ञानिक प्रवीण मोर (39) की अहम भूमिका रही। उन्होंने चंद्रयान-3 के पुर्जों को जोड़ा था। प्रवीण मोर इसरो में एसई के पद पर कार्यरत हैं। उनका काम किसी भी मिशन के लिए यान तैयार करना है। चंद्रयान-3 की सफलता पर सबसे पहले उन्होंने पिता इंद्र सिंह को फोन करके खुशी जताई और उनका आशीर्वाद लिया।
प्रवीण मोर के पिता इंद्र सिंह मोर बिजली निगम में एसडीओ के पद से सेवानिवृत्त हुए हैं। उनकी माता सुरेश मोर एक गृहिणी हैं। प्रवीण मोर का जन्म 1984 में गांव छात्तर में हुआ था। इसके बाद उनके पिता हिसार में शिफ्ट हो गए। प्रवीण मोर ने 12वीं तक की पढ़ाई हिसार से की। इसके बाद उन्होंने जींद के इंजीनियरिंग कॉलेज से इंजीनियरिंग की। 2010 में उनका चयन पॉयलेट, लेफ्टिनेंट तथा इसरो में हुआ। काफी जांच-पड़ताल के बाद प्रवीण मोर ने इसरो में ज्वाइन कर लिया। इसके बाद उनकी कार्यकुशलता को देखते हुए उन्हें दो पदोन्नति मिली। अभी तीसरी पदोन्नति दिसंबर में मिलने वाली है। प्रवीण मोर हरियाणा के इकलौते युवा हैं, जिनका इसरो में वैज्ञानिक के रूप में चयन हुआ है। उनकी पत्नी ज्योति दिल्ली में प्राध्यापिका थीं लेकिन उन्होंने नौकरी छोड़ दी। फिलहाल वह अपने पति प्रवीण मोर के साथ ही रहती हैं।
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चंद्रयान-2 की असफलता रोये थे प्रवीण
पिता इंद्र सिंह मोर ने कहा कि जब चंद्रयान-2 असफल हुआ तो उनका बेटा प्रवीण उनके गले लगकर रोया था। उन्होंने बेटे का हौसला बढ़ाया था। प्रवीण मोर ने कहा कि चंद्रयान-दो टेकऑफ करते हुए असफल होता तो इतना दुख नहीं होता लेकिन चंद्रमा पर उतरने से डेढ़ किलोमीटर पहले असफल होने पर बहुत दुख हुआ। पिता ने कहा था कि असफलता के बाद सफलता बहुत मीठी लगती है और मेहनत करो, सफलता जरूर मिलेगी। इससे उनका हौसला बढ़ा था।
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अब एल-वन की तैयारी में जुटे
प्रवीण मोर की ड्यूटी हालांकि शिफ्टों में रहती थी लेकिन घर आने के बाद भी वह हमेशा गुणा-भाग में ही लगे रहते थे। पत्नी ज्योति जब आराम करने के लिए कहतीं तो प्रवीण मोर कहते कि 23 अगस्त के बाद कुछ दिन आराम ही करेंगे। चंद्रयान-3 मिशन सफल होने के बाद प्रवीण ने सबसे पहले अपने पापा को फोन करके बधाई दी और उनका आशीर्वाद लिया। अब प्रवीण मोर सूर्य पर भेजे जाने वाले मिशन एल-वन की तैयारी में जुट गए हैं।