02जेएनडी33: मांगों को लेकर ज्ञापन सौंपते हुए संघर्ष मोर्चा के सदस्य। स्रोत: संगठन
जींद। हरियाणा किसान मजदूर संघर्ष मोर्चा ने किसानों, खेत-मजदूरों, पशुपालकों और ग्रामीण अर्थव्यवस्था से जुड़ी समस्याओं के समाधान की मांग को लेकर मुख्यमंत्री के नाम मांगपत्र भेजा है। मोर्चा ने सरकार से किसानों के हित में नौ सूत्री मांगों पर तत्काल और स्थायी समाधान करने की मांग की है।
मांगपत्र में मोर्चा के सदस्य धर्मपाल, राजेश, ईश्वर खर्ब व कैप्टन वेदप्रकाश ने कहा गया है कि बड़ी संख्या में किसान तकनीकी खामियों और समय सीमा के कारण ‘मेरी फसल-मेरा ब्योरा’ पोर्टल पर पंजीकरण से वंचित रह गए हैं।
ऐसे में पोर्टल को दोबारा खोलकर प्रत्येक किसान का शत-प्रतिशत पंजीकरण सुनिश्चित किया जाए ताकि किसान फसल बिक्री, खाद-बीज आवंटन, डीएसआर प्रोत्साहन और पराली प्रबंधन जैसी सरकारी योजनाओं का लाभ ले सकें।
मोर्चा ने प्रदेश की मंडियों में 15 सितंबर से परमल धान की सरकारी खरीद शुरू करने, धान खरीद में नमी की सीमा 20 प्रतिशत निर्धारित करने और इस सीमा तक नमी वाली फसल को न्यूनतम समर्थन मूल्य पर खरीदने की मांग की है। साथ ही भारतीय कपास निगम (सीसीआई) से नरमा-कपास की खरीद एमएसपी पर पारदर्शी तरीके से कराने की मांग की गई है।
मांगपत्र में गन्ने का भाव 650 रुपये प्रति क्विंटल घोषित करने, दूध का लाभकारी मूल्य तय करने और मिलावट पर सख्त कार्रवाई, वीटा व दुग्ध संस्थानों की उच्चस्तरीय जांच, सरकारी नहरों व सड़कों के किनारे लगे पेड़ों से होने वाली आय में किसानों की 50 प्रतिशत हिस्सेदारी और हर पांच किलोमीटर के दायरे में नए अनाज खरीद केंद्र स्थापित करने की मांग भी शामिल है। मोर्चा ने चेतावनी दी कि मांगों पर शीघ्र कार्रवाई नहीं हुई तो 10 सितंबर को किसान महापंचायत में आंदोलन की आगामी रणनीति तय की जाएगी।