बिशंबर नगर निवासी 21 वर्षीय सागर की हत्या करने के आरोपी विजय ने एक साल पहले भी सागर पर जानलेवा हमला किया था, लेकिन तब यह मामला पंचायत स्तर पर निपटा दिया गया था। अगर उसी समय इस मामले में कानूनी कार्रवाई हुई होती तो आज सागर जिंदा होता। सागर की हत्या के बाद उसकी मां और बहन का रो-रोकर बुरा हाल है। करीब 15 साल पहले बीमारी से सागर के पिता की और दस साल पहले सागर के बड़े भाई की सड़क हादसे में मौत हो गई थी। अब सागर की हत्या के बाद घर में अकेली मां-बेटी बची हैं।
परिजनों ने बताया कि एक साल पहले हुए विवाद में पंचायत द्वारा समझौता करवा दिया गया था। समझौते के बाद भी विजय अपनी हरकतों से बाज नहीं आया। जब भी वह सागर के घर के बाहर से निकलता था तो कभी सागर तो कभी उसकी मां को अपशब्द कहता था। सागर की मां उषा देवी ने बताया कि विजय की इन हरकतों की लगातार अनदेखा की और इसकी जानकारी किसी को नहीं दी। वह नहीं चाहती थी कि विजय की इन हरकतों के बारे में सागर को पता चले और झगड़ा हो। उषा देवी के अनुसार पहले ही वह अपने पति और बड़े बेटे को खो चुकी है। अब सागर से ही उम्मीदें थीं। सागर मजदूरी करके अपनी मां और बहन का पालन-पोषण कर रहा था।
पति की मौत के बाद बेटों को देखकर भुलाया था गम
सागर की मां ने कहा कि लगभग 15 वर्ष पहले कैंसर की बीमारी के कारण उसके पति कृष्ण की मौत होने हो गई थी। पति की मौत से वह बुरी तरह से टूट चुकी थी, लेकिन दो बेटों को देखकर उसने पति के के चले जाने का गम भुला दिया था। पति की मौत के पांच साल बाद बड़े बेटे की सड़क हादसे में मौत हो गई। अब ठीक दस वर्ष बाद उसके दूसरे बेटे की हत्या कर दी गई। इन 15 वर्षों में उसका हंसता-खेलता परिवार खत्म हो गया।
आरोपियों की गिरफ्तारी की मांग को लेकर शव लेने से किया मना
सागर के शव का पोस्टमार्टम होने के लगभग दो घंटे बाद तक परिजनों ने शव लेने से इनकार करते रहे। उनकी मांग थी कि आरोपियों को गिरफ्तार किया जाय। उन्होंने कहा कि सागर की हत्या में विजय अकेले नहीं है, उसके परिजन भी शामिल हैं। आरोपी के परिजनों की गिरफ्तारी की मांग को लेकर लगभग दो घंटे तक शव मोर्चरी के बाहर पड़ा रहा। इसके बाद डीएसपी धर्मबीर खर्ब ने आरोपियों की शीघ्र गिरफ्तारी का आश्वासन देकर सागर के परिजनों को मनाया। सागर के परिजनों ने आश्वासन के बाद शव का अंतिम संस्कार किया।
सागर की बहन के सवाल से पुलिस रही निशब्द
पोस्टमार्टम के बाद जब शव परिजनों को सौंपा जा रहा था तो सागर की 13 वर्षीय बहन सीमा और सागर की मां उषा शवगृह के बाहर बैठ गईं। इस दौरान सागर की बहन को समझाने के लिए शहर थाना प्रभारी रोहताश ढुल पहुंचे तो उसने सवाल किया कि पुलिसकर्मियों को मारने वाले को गोली मार दी गई तो उसके भाई को मारने वाला जिंदा क्यों है। थाना प्रभारी इसका जवाब नहीं दे सके और चुपचाप खड़े रहे।