जींद। बेशक एक जुलाई से सिंगल यूज प्लास्टिक प्रतिबंधित हो गया हो लेकिन जिले में यह हर दुकान पर खुलेआम देखा जा रहा है। आप किसी भी दुकान पर सामान लेने जाओ तो दुकानदार आपको तुरंत पॉलिथीन में सामान डालकर दे देगा। सब्जी विक्रेता भी धड़ल्ले से पॉलीथिन का प्रयोग कर रहे हैं। नगर परिषद ने कुछ दिन दुकानदारों को जागरूक करने के लिए अभियान भी चलाया लेकिन बहुत से दुकानदार ऐसे हैं, जिनको यही पता नहीं कि क्या बंद हुआ है और क्या नहीं। शुक्रवार को नगर परिषद ने छह दुकानदारों के चालान किए। अब नगर परिषद अभियान चलाकर लोगों को जागरूक करने के साथ-साथ दुकानदारों के चालान भी करेगी।
प्रदूषण फैलाने में सिंगल यूज प्लास्टिक सबसे बड़ा कारण है। इससे बनीं वस्तुएं डी-कम्पोज नहीं होती और न ही इन्हें जलाया जा सकता। इनको जलाने से हानिकारक धुआं निकलता है, जो बहुत ही खतरनाक है। इन सभी खतरनाक परिणामों को देखते हुए देश में सिंगल यूज प्लास्टिक बंद कर दिया है। इसके बावजूद शहर में धड़ल्ले से सिंगल यूज प्लास्टिक बिक रहा है। खुलेआम लोग पॉलिथीन में सामान लेकर जाते देखे जा सकते हैं। दुकानदार भी सामान देने के लिए फिलहाल पॉलिथीन का ही प्रयोग कर रहे हैं। सब्जी व परचून के सामान की दुकानों और अन्य दुकानों में पॉलिथीन में खुलेआम सामान रखा हुआ मिल जाएगा। नगर परिषद व जिला प्रशासन को जितना लोगों को जागरूक करना चाहिए था, उतना नहीं किया। केवल एक दिन डीसी समेत अन्य अधिकारियों ने रानी तालाब से लेकर लघु सचिवालय तक पैदल मार्च किया था। इसके अलावा ऐसे कोई कार्यक्रम नहीं हुए, जहां लोगों को सिंगल यूज प्लास्टिक के बारे में लोगों को जागरूक किया गया है। एक जुलाई को ही नगर परिषद ने दुकानदारों के चालान काटने शुरू कर दिए थे। शनिवार व रविवार को छुट्टी होने के कारण यह कार्यक्रम बंद रहा।
ये वस्तुएं आएंगी सिंगल यूज प्लास्टिक में
पॉलिथीन, प्लास्टिक के प्लेट्स, कप, गिलास, छूरी, कांटा, ईयर बड्स स्टिक, गुब्बारे की स्टिक, झंडे, कैंडी स्टिक, आइसक्रीम स्टिक, पेय पदार्थ पीने वाली स्टिक, डेकोरेशन में प्रयोग होने वाला थर्माकोल, आमंत्रण पत्र, 100 माइक्रॉन से कम प्लास्टिक, प्लास्टिक की बोतल, पैकेजिंग, फेस मास्क, कॉफी कप, क्लिंग फिल्म, कचरा बैग व फूड पैकेजिंग जैसी वस्तुएं।
अब क्या होगा विकल्प
केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने लोगों से इको-फ्रेंडली विकल्प चुनने का अनुरोध किया है। सरकार ने प्लास्टिक थैलियों की बजाय कॉटन थैलियों का इस्तेमाल करने का सुझाव दिया है। इसके अलावा प्लास्टिक की थैलियों की जगह कपड़े के बने बैग का उपयोग किया जा सकता है। ऑर्गेनिक कॉटन, ऊन या बांस से बने टिकाऊ कपड़े धोने पर प्लास्टिक के रेशे नहीं छोड़ते हैं। इसके अलावा दोबारा प्रयोग होने वाले बर्तन, कम्पोस्टेबल प्लास्टिक का प्रयोग किया जा सकता है।
नालों में रुकावट का कारण पॉलिथीन
शहर में सीवरेज पाइपों या नालों में रुकावट का कारण पॉलिथीन ही है। यह न तो गलता है और न ही खत्म होता है। तेज हवा में पूरा दिन पॉलिथीन को इधर-उधर उड़ते देखा जा सकता है। लोग पॉलिथीन को घरों से बाहर फेंक देते हैं। येनालों या सीवर लाइन में आकर ही रुकते हैं। इस कारण नाले व सीवर अवरुद्ध हो जाते हैं।
प्रतिदिन 12 टन निकलता है कचरा
जिले में प्रतिदिन 12 टन के आसपास कचरा निकलता है। इसमें अधिकतर पॉलिथीन तथा अन्य इस प्रकार की प्लास्टिक की वस्तुएं होती हैं। चूंकि ये गलती नहीं हैं इसलिए डंपिग प्वाइंट पर इनके ढेर लगे हैं। जिले में प्रतिदिन 10 लाख रुपये को सिंगल यूज प्लास्टिक का कारोबार होता है।
एक जुलाई से सिंगल यूज प्लास्टिक बैन हो गया है। इसके बेचने और बनाने पर जुर्माना लगाया जा रहा है। शुक्रवार को छह दुकानदारों के चालान किए गए थे। सोमवार से फिर से यह अभियान लगातार जारी रहेगा। इसमें लोगों व दुकानदारों को जागरूक किया जाएगा। पर्यावरण संरक्षण के लिए हर नागरिक को अपने दायित्व का निर्वहन करते हुए प्रतिबंधित सामान का प्रयोग नहीं करना चाहिए।
--सुशील कुमार, ईओ नगर परिषद, जींद।