पिछले साल नवंबर में जिला परिषद को मिली 41.69 करोड़ रुपये की राशि अब लैप्स नहीं होगी। इस राशि से अगले वित्त वर्ष में भी विकास कार्य करवाए जा सकेंगे। इसके लिए प्रदेश सरकार ने विशेष अनुमति दे दी है। ऐसे में इस राशि से विकास कार्य करवाने के लिए जिला परिषद द्वारा प्रस्ताव तैयार किए जा रहे हैं। अप्रैल में यह प्रस्ताव सरकार को भेज दिया जाएगा। मंजूरी मिलने के बाद काम शुरू करवाए जाएंगे।
गौरतलब है कि नवंबर 2020 में प्रदेश सरकार ने जिला परिषद को 41.69 करोड़ रुपये दिए थे। इसके बाद जनवरी में इसके लिए सरकार द्वारा निर्देश जारी किए थे कि आधी राशि स्वच्छता पर खर्च की जानी है और आधी राशि निर्माण कार्यों पर लगाई जाएगी। इसमें कई तरह के विकास कार्यों को चिह्नित किया गया। इस बीच विकास कार्यों को लेकर जिला परिषद की बैठक नहीं हो सकी। जब हुई तो पार्षदों ने सभी अधिकार निवर्तमान चेयरपर्सन प्रवीण देवी घणघस को दिए। पार्षदों द्वारा दिए गए विकास कार्यों के आधार पर प्रस्ताव ही तैयार हो रहे थी कि पंचायतों का कार्यकाल पूरा हो गया। सरकार ने 15 फरवरी को सभी नए विकास कार्यों पर रोक लगा दी। इसके बाद यह राशि खर्च नहीं हो पाई और 41.69 करोड़ रुपये पर लैप्स होने का संकट मंडराने लगा था।
राजनीतिक हस्तक्षेप के आरोप लगे
इस दौरान पार्षदों ने राशि को लेकर राजनीतिक हस्तक्षेप के आरोप भी लगाए। इसमें सरकार द्वारा जींद जिले के विकास कार्य प्रभावित करने की बात भी कही गई। हालांकि अब इस राशि को खर्च करने के लिए मंजूरी मिल गई है।
सीईओ ने लिखा पत्र, मिली मंजूरी
जिले के विकास के लिए आई राशि से कार्य नहीं हो सकने, पर जिला परिषद के मुख्य कार्यकारी अधिकारी दलबीर सिंह ने सरकार को पत्र लिखकर इस राशि से अगले वित्त वर्ष में कार्य करवाने की अनुमति मांगी थी। 10 मार्च को भेजे गए इस पत्र के जवाब में सरकार ने 19 मार्च को पत्र भेजकर अगले वित्त वर्ष में विकास कार्य करवाने की अनुमति दे दी है।
तैयार किए जा रहे हैं प्रस्ताव
सीईओ द्वारा भेजे गए पत्र पर सरकार ने 41.69 करोड़ रुपये अगले वित्त वर्ष में खर्च करने के लिए मंजूरी दे दी है। यह जिले के विकास के लिए काफी अहम है। राशि खर्च करने के लिए सरकार के निर्देशों के अनुसार प्रस्ताव तैयार किए जा रहे हैं। अगले महीने प्रस्ताव तैयार कर सरकार को भेज दिए जाएंगे।
अजीत सिंह, डिप्टी सीईओ, जिला परिषद।