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दिल्ली में संसद के सामने 23 को क्रांतिकारी युवा किसान संसद का होगा आयोजन

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पत्रकारवार्ता के दौरान बातचीत करते संदीप सिंह भारती। संवाद - फोटो : Jind
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सांझा युवा किसान मोर्चा के संयोजक संदीप सिंह भारती ने अर्बन इस्टेट स्थित जाट धर्मशाला में पत्रकारों से बातचीत में कहा कि किसान आंदोलन को लेकर केंद्र सरकार का रवैया अपमानजनक है। राजा जनता का पिता होता है और किसान को अन्नदाता कहा जाता है। ऐसे में सरकार की किसान को लेकर विशेष जिम्मेदारी बनती है। किसान अपनी मांगों को लेकर पिछले तीन महीने से आंदोलन कर रहे हैं, लेकिन सरकार उनकी बात की सुनवाई नहीं कर रही है। किसानों के खिलाफ अनापशनाप बयानबाजी कर रही है। ऐसे में 23 मार्च को संसद भवन के सामने क्रांतिकारी युवा संसद का आयोजन किया जाएगा।
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उन्होंने कहा कि कृषि कानूनों की वापसी के साथ-साथ किसान की कर्ज मुक्ति और फसल के लाभकारी भाव मिलने की मांगों को साथ लेकर 23 मार्च को शहीद-ए-आजम भगत सिंह, राजगुरु व सुखदेव के शहादत दिवस पर संसद भवन के आगे क्रांतिकारी युवा किसान संसद का आयोजन किया जाएगा। उन्होंने कहा कि गेहूं की फसल आने से पहले युवा सरकार को उनकी तकलीफ का समाधान करने के लिए मजबूर करेंगे। उन्होंने मांग की कि सबसे पहले किसानों का पूरा कर्ज माफ किया जाए। तीनों कृषि कानूनों को रद्द करने के साथ-साथ किसानों को उनकी फसलों का लाभकारी भाव मिलना चाहिए। 23 मार्च को युवा किसान संसद करने से पहले गांव-गांव जाकर संसद कार्यक्रमों का आयोजन करेंगे। इसकी शुरुआत शनिवार को पानीपत के गांव नोरधा से की जाएगी। उन्होंने टिकैत समेत अन्य किसान नेताओं से आह्वान किया कि वह अपने तरीके में बदलाव कर युवाओं के साथ चलें। उन्होंने कहा कि किसान आंदोलन में कुछ ऐसे ठेकेदार बन गए हैं, जिनका छह महीने का भी किसानों के लिए कुछ करने का इतिहास नहीं है। इस अवसर पर जितेेंद्र क्रांति, हरिकेश ढांडा व सचिन सिवाच मौजूद रहे।
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