जींद। जिले में पली-बढ़ी खुशबू मलिक आज खेल जगत में संघर्ष, समर्पण और नेतृत्व की मिसाल बन चुकी हैं। मूलरूप से गांव ईशापुर खेड़ी, गोहाना की निवासी हैं। पिता बिजली बोर्ड में कांट्रैक्ट बेस पर ग्रुप डी पद पर कार्यरत हैं। चार बहनों वाले परिवार में खुशबू का कोई भाई नहीं है लेकिन माता-पिता ने बेटियों को कभी कमजोर नहीं समझा। काफी समय पहले उनका परिवार जींद आकर बस गया।
खुशबू ने वर्ष 2017 में सातवीं कक्षा के दौरान खेलों में कदम रखा। उनके स्कूल में कोच राजपाल रेढू के आने के बाद उन्होंने थ्रो बॉल खेलना शुरू किया। कोच राजपाल रेढू न केवल उनके प्रशिक्षक रहे बल्कि उनके परिवार ने भी हर कदम पर खुशबू को प्रोत्साहित किया। मार्गदर्शन और स्नेह ने खुशबू को एक अनुशासित, आत्मविश्वासी और जिम्मेदार खिलाड़ी के रूप में गढ़ा।
वर्ष 2019 में उन्होंने अपनी पहली सब-जूनियर थ्रोबॉल राष्ट्रीय प्रतियोगिता में स्वर्ण पदक जीतकर पहचान बनाई। इसके बाद जूनियर राष्ट्रीय स्तर पर दो स्वर्ण पदक और सीनियर स्तर पर तीन स्वर्ण पदक जीतकर उन्होंने थ्रो बॉल में अपनी मजबूत पकड़ साबित की। थ्रोबॉल में सफलता हासिल करने के बाद खुशबू ने भारत में उभरते खेल लैक्रोस को चुना। वर्ष 2023 में आगरा में आयोजित सीनियर राष्ट्रीय लैक्रोस प्रतियोगिता में उन्होंने रजत पदक जीता। इसके बाद 2024 और 2025 की सीनियर राष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में भी रजत पदक हासिल किए, जहां वे हरियाणा सीनियर महिला लैक्रोस टीम की कप्तान रहीं।
खुशबू के कॅरिअर का सबसे गौरवपूर्ण क्षण तब आया, जब उन्हें एशियन लैक्रोस चैंपियनशिप के लिए भारतीय सीनियर महिला लैक्रोस टीम में चयनित किया गया। वह इस प्रतियोगिता में देश के लिए स्वर्ण पदक जीतने के संकल्प के साथ उतरने को तैयार हैं। खुशबू बताती हैं कि जींद लैक्रोस संघ के प्रधान सोमनाथ सैनी भी समय-समय पर उनका हौसला बढ़ाते हैं और मैदान पर आवश्यक खेल सामग्री उपलब्ध कराते हैं। उनका अंतिम लक्ष्य वर्ष 2028 में लॉस एंजेलिस ओलंपिक में भारत का प्रतिनिधित्व करना है। खुशबू मलिक की यह यात्रा न केवल एक खिलाड़ी की कहानी है, बल्कि यह आने वाली पीढ़ियों के लिए संघर्ष, अनुशासन और सपनों को साकार करने की प्रेरणा भी है।