01जेएनडी06-माता चन्नन देवी आर्य कन्या गुरुकुल में छात्राएं सवाल-जवाब करती छात्राएं। स्रोत संस्थ
जींद। माता चन्नन देवी आर्य कन्या गुरुकुल पिल्लूखेड़ा में किशोरियों और शिक्षकों के लिए तनाव से मुक्त होने के उपाय, सकारात्मक जीवन जीने के तरीकों को लेकर सेमिनार हुआ। इसकी अध्यक्षता प्रधानाचार्य ज्योति छिब्बर ने जबकि परामर्शदाता नीरज कुमार ने छात्राओं को जागरूक किया।
परामर्शदाता नीरज कुमार ने छात्राओं को बताया कि जीवन कौशल वे क्षमताएं हैं, जो व्यक्तियों को दैनिक जीवन की चुनौतियों का सामना करने, स्वस्थ संबंध बनाने और लक्ष्यों को प्राप्त करने में मदद करती हैं। कहा कि हर इंसान कभी न कभी तनाव से गुजरता है। हमें इसको पहचानना होगा। जब भी बहुत अधिक तनाव महसूस हो तो आराम करना जरूरी होता है।
तनाव के बारे में दूसरों से बात करें। नीरज ने छात्राओं को हमेशा सकारात्मक रहने के लिए कहा। हमें सकारात्मक जीवन जीने के लिए हर परिस्थिति में अच्छाई ढूंढना, आभार व्यक्त करना, नियमित योग व व्यायाम करना और नकारात्मक लोगों व विचारों से दूरी बनाना आवश्यक है। इसके अलावा संतुलित आहार, पर्याप्त नींद और सकारात्मक आत्म चर्चा के माध्यम से मानसिक शांति बनाई जा सकती है जो जीवन को खुशहाल और सार्थक बनाता है।
उन्होंने कहा कि किशोरावस्था में भावनात्मक बदलाव आते हैं। जिन्हें समझना जरूरी है और अपने आप पर कंट्रोल रखना है। प्रधानाचार्य ज्योति छिब्बर ने कहा कि बच्चे अपने काम खुद करें तो वो उसमें व्यस्त रहेंगे। इससे वो जिम्मेदारी लेना सीखेंगे और धीरे-धीरे आत्मनिर्भर बनेंगे। यदि हम चाहते हैं कि आपका बच्चा सिर्फ अच्छे नंबर ही न लाए बल्कि जिंदगी में भी मजबूत बने तो उसे पढ़ाई के साथ-साथ आत्मनिर्भर बनाना जरूरी है, क्योंकि छोटी उम्र में जो सीखा जाता है, उसका असर पूरी जिंदगी रहता है। संतुलित आहार, नियमित व्यायाम और पर्याप्त नींद मस्तिष्क को स्वस्थ रखने में मदद करती है।