जींद। हिंदी साहित्य प्रेरक संस्था की ओर से संत कबीर जयंती पर ऑनलाइन काव्य उत्सव का आयोजन किया गया। संस्था के महासचिव बलराज स्नेही ने बताया कि इसमें पूरे हरियाणा से कवि जुड़े और कबीर के प्रति अपनी श्रद्धा को काव्य के माध्यम से अभिव्यक्त किया।
संस्था की प्रधान शकुंतला काजल शकुन ने बड़ी ही कुशलता से निभाया और सभी कवियों और रचनाओं को जोड़े रखा। पाबड़ा से कवि नरेश शर्मा ने रागनी गाई औ तू आ कै देख कबीर, हे संत कबीर दास धन्य धन्य सो बार है तूने।
डॉ. सतबीर निराला ने कबीर के यथार्थ को गाते हुए कहा जीते बाप को धक्कम धक्का मरे नै गंगा ले जावै। मेवात से जुड़ी कवयित्री डॉ. आशा ने चेतावनी भजन में कहा विश्व के बनते हो ठेकेदार, पहले खुद अपना अस्तित्व सम्भालो। संदीप बावरा ने संतन तो भाई वही कहाए जो समझै सबकी पीर का भजन गाया।