जींद। जिले के रामराय गांव की खिलाड़ी संध्या ढुल खेल जगत में संघर्ष, समर्पण और आत्मविश्वास की मिसाल बन चुकी हैं। साधारण परिवार से निकलकर राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर तक अपनी पहचान बनाने वाली संध्या की सफलता की कहानी क्षेत्र के युवाओं के लिए प्रेरणादायक है।
संध्या ने वर्ष 2015 में छठी कक्षा के दौरान जींद के गोपाल विद्या मंदिर में राजिंदर सैनी के मार्गदर्शन में हैंडबॉल खेलना शुरू किया। शुरुआत से ही उनके परिवार ने उन्हें पूरा सहयोग और प्रोत्साहन दिया।
कड़ी मेहनत और निरंतर अभ्यास के दम पर उन्होंने वर्ष 2019 में पहली सब जूनियर नेशनल प्रतियोगिता और एसजीएफआई में पदक हासिल कर अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाया। चार भाई-बहनों में संध्या को खेलते देख उनकी छोटी बहन में भी खेल के प्रति रुचि जागृत हुई।
संध्या के खेल जीवन में स्वर्गीय सतबीर कोच का विशेष योगदान रहा। वह प्रतिदिन सुबह-शाम रामराय गांव से अर्जुन स्टेडियम तक अभ्यास के लिए जाती थीं। इसी दौरान वर्ष 2019 में उन्हें घुटने की गंभीर चोट का सामना करना पड़ा जिससे उनका करियर प्रभावित हुआ लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी।
वर्ष 2021 में उनके पिता के निधन से परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा। इस कठिन समय में उनके चाचा जयबीर ढुल ने साथ दिया और उन्हें पिता की कमी महसूस नहीं होने दी। उनके सहयोग से संध्या ने फिर से अपने खेल पर ध्यान केंद्रित किया। सोना और सोमनाथ कोच ने भी उनके प्रशिक्षण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
संध्या की मेहनत रंग लाई और वर्ष 2023 में उन्होंने खेल कोटे से हरियाणा में ग्रुप-डी की सरकारी नौकरी प्राप्त की। वर्ष 2024 में कोच चिराग और अनुमित सांगवान के मार्गदर्शन में उन्होंने स्पेन में आयोजित वर्ल्ड यूनिवर्सिटी गेम्स में भारत का प्रतिनिधित्व कर देश और जिले का नाम रोशन किया। संध्या अब तक राज्य व राष्ट्रीयस्तर की प्रतियोगिताओं में भाग लेकर कई पदक जीत चुकी हैं।