फोटो 01जेएनडी05-नशा मुक्ति केंद्र में उपचाराधीन व्यक्तियों से बातचीत करते सचिव अमित सिहाग। स्रो
जींद। जिला विधिक सेवा प्राधिकरण अमित सिहाग ने मंगलवार को नशा मुक्ति केंद्र का औचक निरीक्षण किया। इस दौरान प्राधिकरण सचिव ने केंद्र में उपचाराधीन व्यक्तियों को उपलब्ध करवाई जा रही चिकित्सा, भोजन, स्वच्छता एवं अन्य आवश्यक सुविधाओं का जायजा लिया।
उन्होंने उपचाराधीन व्यक्तियों तथा केंद्र के स्टाफ से बातचीत कर व्यवस्थाओं की जानकारी ली और आवश्यक दिशा-निर्देश जारी किए। सचिव अमित सिहाग ने कहा कि नशा व्यक्ति, परिवार और समाज तीनों के लिए गंभीर अभिशाप है। नशे से दूर रहकर ही स्वस्थ, सुरक्षित एवं समृद्ध समाज का निर्माण किया जा सकता है।
उन्होंने लोगों से आह्वान किया कि वे स्वयं नशे से दूर रहें और अपने आसपास के लोगों को भी नशा छोड़ने के लिए प्रेरित करें। सामूहिक प्रयासों से ही समाज को नशामुक्त बनाने के अभियान को मजबूती प्रदान की जा सकती है।
उन्होंने बताया कि भारत में वर्ष 1985 से नारकोटिक ड्रग्स एंड साइकोट्रॉपिक सब्सटेंस अधिनियम (एनडीपीएस एक्ट) लागू है। इसके तहत मादक पदार्थों से संबंधित अपराधों के लिए कठोर कानूनी प्रावधान किए गए हैं। कई अपराध संज्ञेय एवं गैर-जमानती हैं।
कानून का उद्देश्य केवल अपराधियों को दंडित करना ही नहीं, बल्कि समाज को नशे जैसी गंभीर समस्या से सुरक्षित रखना भी है। निरीक्षण के दौरान नशा मुक्ति केंद्र में 13 उपचाराधीन व्यक्ति उपस्थित पाए गए। उन्होंने केंद्र में उपलब्ध चिकित्सा सुविधाओं, भोजन, स्वच्छता तथा अन्य व्यवस्थाओं की जानकारी ली।