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Jind News: पराली जलाने से रोकने के लिए गांव-गांव मुनादी, किसानों को बताए प्रबंधन के तरीके

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फोटो 26जेएनडी21-मशीन के माध्यम से किया गया पराली का प्रबंधन। स्रोत प्रशासन
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जींद। पराली जलाने की घटनाओं को रोकने और किसानों को फसल अवशेषों के उचित प्रबंधन के प्रति जागरूक करने के लिए कृषि विभाग ने गांव-गांव अभियान चलाया हुआ है। अभियान के तहत मुनादी करवाकर किसानों को पराली नहीं जलाने और जागरूकता शिविर लगाकर पराली प्रबंधन के वैज्ञानिक तरीकों की जानकारी दी जा रही है।
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कृषि उपनिदेशक डॉ. सुखदेव कम्बोज ने बताया कि रविवार को खटकड़, डूमरखा खेड़ा, दनौदा, शामदो, भौंगरा, नेपेवाला, वडोदरा, पोंकरी खेड़ी और उझाना सहित जिले के कई गांवों में जागरूकता शिविर लगाए गए। इनमें किसानों को पराली जलाने से होने वाले नुकसान और फसल अवशेषों के सही प्रबंधन के बारे में बताया गया।
उन्होंने बताया कि किसानों को पराली प्रबंधन के दो प्रमुख तरीकों एक्स-सीटू और इन-सीटू के बारे में जागरूक किया जा रहा है। एक्स-सीटू प्रबंधन के तहत पराली को खेत से बाहर निकालकर दूसरे कार्यों में इस्तेमाल किया जाता है।
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वहीं, इन-सीटू प्रबंधन में कृषि यंत्रों की मदद से फसल अवशेषों को खेत में ही मिट्टी में मिलाया जाता है। इन तरीकों को अपनाकर पराली जलाने की जरूरत को कम किया जा सकता है। उन्होंने कहा कि पराली जलाने से वायु प्रदूषण बढ़ता है और मिट्टी की उर्वरा शक्ति पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है। इससे मिट्टी में मौजूद लाभकारी सूक्ष्मजीवों और पोषक तत्वों को भी नुकसान पहुंचता है। ऐसे में किसानों को कृषि यंत्रों और वैज्ञानिक तरीकों से फसल अवशेषों का प्रबंधन करना चाहिए।

खेतों में निगरानी, ड्रोन से भी हो रही मॉनिटरिंग
कृषि उपनिदेशक डॉ. सुखदेव कम्बोज ने बताया कि जागरूकता अभियान के साथ खेतों में पराली जलाने की घटनाओं पर भी नजर रखी जा रही है। विभाग की टीमें फील्ड में निगरानी कर रही हैं और ड्रोन की मदद से भी मॉनिटरिंग की जा रही है। उन्होंने किसानों से अपील की कि वे पर्यावरण और मिट्टी की सेहत को ध्यान में रखते हुए पराली न जलाएं तथा फसल अवशेषों का उचित प्रबंधन करें।
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