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21 दिन में मिलेगी प्रॉपर्टी आईडी, हर आवेदन की रजिस्टर में होगी एंट्री

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जींद। एक सप्ताह पहले नग रपरिषद में प्रॉपर्टी आईडी के नाम पर रिश्वत लेने के आरोप में सफाईकर्मी के पकड़े जाने के बाद अब व्यवस्था बदली गई है। अब प्रॉपर्टी आईडी के लिए आने वाले हर आवेदन की एंट्री एक रजिस्टर में होगी, जबकि पहले इसकी व्यवस्था नहीं थी। वहीं सभी औपचारिकताएं पूरी करने पर नगर परिषद 21 दिन में प्रॉपर्टी आईडी बनाकर देगा।
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गौरतलब है कि प्रॉपर्टी आईडी के लिए पिछले लंबे समय में नगर परिषद में अव्यवस्था रहती थी। इसी बीच एक सफाई कर्मचारी को विजय नगर निवासी व्यक्ति से ढाई हजार रुपये रिश्वत लेते 10 फरवरी को पकड़ा था। इसके बाद नगर परिषद के कार्यकारी अधिकारी ने नई व्यवस्था लागू की है। फिलहाल नगर परिषद से प्रॉपर्टी आईडी लेने के लिए लोग खिड़की पर जाते हैं। यहां से बकाया संपत्ति कर का भुगतान करवाया जाता है। इसके बाद फाइल पर पटवारी की रिपोर्ट होती है। फिर कार्यकारी अधिकारी द्वारा फीस लगाई जाती है और इसके बाद उस प्रॉपर्टी को ऑनलाइन पोर्टल पर दर्ज किया जाता है। इस पूरी प्रक्रिया में प्रॉपर्टी का मालिक फाइल के साथ घूमता है।
गुम हो जाती हैं फाइल
नगर परिषद में सबसे अधिक परेशानी लोगों को फाइल गुम होने के कारण होती है। जैसे ही फाइल को खिड़की पर जमा करवाया जाता है, प्रॉपर्टी मालिक को बाद में बुलाया जाता है। जब वह दोबारा आता है तो फाइल नहीं मिलती। ऐसे में रजिस्टर इस समस्या से भी निजात दिलवाएगा। इसके बाद संबंधित कर्मचारी की जिम्मेदारी होगी कि फाइल सुरक्षित रहे।
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यह होगी नई व्यवस्था : प्रॉपर्टी आईडी के लिए सिर्फ आवेदन पत्र, प्रॉपर्टी की रजिस्ट्ररी की फोटो कॉपी व पहचान पत्र की फोटो कॉपी की फाइल जमा करवानी होगी। इसके बाद रजिस्टर से उसे एक डिस्पैच नंबर दिया जाएगा। अब उसे सिर्फ वह नंबर ही संभाल कर रखना है। फाइल पर सभी औपचारिकताएं खुद ही संबंधति कर्मचारियों द्वारा की जाएंगी। सबसे पहले फाइल गृहकर विभाग में जाएगी। यहां से व्यक्ति को बताया जाएगा कि कितनी फीस भरनी है। इसके बाद वह फीस भरेगा और यदि प्रॉपर्टी वैध कॉलोनी में है तो प्रॉपर्टी आईडी बन जाएगी।
कुछ लोग भ्रष्टाचार करते हैं। जैसे ही इसकी जानकारी मिली, तुरंत नई व्यवस्था की गई है। मेरे पास नियमित रूप से लोग प्रॉपर्टी आईडी के हस्ताक्षर के लिए आते हैं। उनके हस्ताक्षर भी कर दिए जाते हैं, लेकिन बीच में कुछ लोग खेल करते हैं, उनको रोकने के लिए यह व्यवस्था की गई है। - डॉ. एसके चौहान, कार्यकारी अधिकारी, जींद
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