फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

जमीन के रेट में फंसी शहर को नहरी पेयजल मुहैया करवाने वाली परियोजना

विज्ञापन
विज्ञापन
जींद। तीन साल पहले मुख्यमंत्री द्वारा जींद को नहरी पेयजल उपलब्ध करवाने की घोषणा अभी तक सिरे नहीं चढ़ सकी है। इस परियोजना के लिए तीन साल से सरकार जमीन तलाश रही है, लेकिन अभी तक जमीन का सौदा नहीं हो सका है। अब बड़ौदा गांव में किसानों ने जलघर के लिए जमीन देने की पेशकश की है लेकिन कीमत को लेकर एक बार फिर परियोजना में अड़ंगा लगता दिखाई दे रहा है।
विज्ञापन

एक ओर किसान 45-50 लाख रुपये प्रति एकड़ की मांग कर रहे हैं, वहीं दूसरी ओर सरकार अभी तक 20-25 लाख रुपये प्रति एकड़ तक देने की बात कह रही है।
दरअसल जींद शहर में पेयजल के लिए फिलहाल दो तरह की व्यवस्था हैं। हरियाणा शहरी विकास प्राधिकरण के क्षेत्र में नहरी पानी दिया जा रहा है। इसके लिए हांसी ब्रांच नहर के पास ही जलघर बनाया गया है। इसकों हांसी ब्रांच नहर से ही पानी मिलता है। इसके अलावा अन्य शहर ट्यूबवैल का पानी पी रहा है। शहर में अधिकतर जगह भूमिगत पानी खारा है। हालांकि जनस्वास्थ्य विभाग का कहना है कि जो पानी घरों में सप्लाई किया जा रहा है, वह नियमानुसार सप्लाई किया जा सकता है, लेकिन इसमें टीडीएस की मात्रा काफी अधिक है। ऐसे में शहर के लोग पेयजल की समस्या से जूझ रहे हैं। शहर में 50 से अधिक ट्यूबवेल से पेयजल सप्लाई किया जा रहा है।
भाखड़ा नहर से लाना है पानी
नई योजना के तहत जींद शहर के लिए पेयजल नरवाना के पास से निकले वाली भाखड़ा नहर से मिलेगा। करीब दो साल पहले प्रदेश सरकार ने इस परियोजना को सैद्धांतिक मंजूरी देते हुए 400 करोड़ रुपये का प्रावधान भी किया है।
विज्ञापन

नियमानुसार 40 लाख रुपये तक मिलेगी कीमत
सरकार ने नियम बनाया है कि जमीन के क्लेक्टर रेट से ढाई गुणा अधिक तक कीमत दी जा सकती है। ऐसे में जिस जमीन को लेने की बात चल रही है, वहां इसके अनुसार प्रति एकड़ करीब 40 लाख रुपये कीमत बन रही है। कीमत को लेकर कुछ दिक्कत आ रही है। इसके लिए मुख्यमंत्री तक से बात हुई है। किसानों से बातचीत कर परियोजना को सिरे चढ़ाया जाएगा।
डॉ. कृष्ण मिड्ढा, भाजपा विधायक, जींद।
सरकार के पास दो विकल्प
हालांकि पहले जनस्वास्थ्य विभाग जलघर के लिए 70 एकड़ जमीन की मांग कर रहा था, लेकिन परियोजना के लिए भाखड़ा नहर से पानी आने पर 45 एकड़ में भी काम चल सकता है।दरअसल भाखड़ा नहर में पूरा साल पानी रहता है। ऐसे में पानी एकत्रित करने के लिए अधिक क्षमता के टैंक की जरूरत नहीं होगी और कम जमीन में भी काम चल जाएगा। ऐसे में बड़ौदी गांव में 50-50 एकड़ के दो भूखंडों के लिए ई-भूमि पोर्टल पर किसानों जमीन ऑपर की है। इनमें से कोई भी एक सरकार ले सकती है।
सरकार को तय करनी है कीमत
जिला स्तर पर ई-भूमि पोर्टल से किसानों ने जमीन ऑफर की है। इसके लिए जनस्वास्थ्य विभाग ने अपनी कार्रवाई की। अब मामला कीमत में फंसा है। यह सरकार और किसानों के बीच की बात है। जैसे ही जमीन विभाग को मिल जाएगी, जलघर का काम शुरू हो जाएगा।
विज्ञापन

राजेंद्र जांगड़ा, एसई, जनस्वास्थ्य विभाग, जींद।
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें