चौधरी रणबीर सिंह विवि में चल रही भर्ती में गड़बड़ी का आरोप लगाने वाले डीन ऑफ एकेडमिक प्रोफेसर संदीप बेरवाला को सोमवार को विवि की कार्यकारी परिषद की बैठक में निलंबित कर दिया गया है। वहीं प्रोफेसर बेरवाल का धरना विवि के अंदर कुलपति कार्यालय के बाहर रातभर जारी रहा। इसके चलते विवि के मुख्य गेट से लेकर प्रशासनिक भवन के दोनों तरफ के गेट बंद रहे।
प्रोफेसर संदीप बेरवाल का कहना है कि कुलपति प्रोफेसर आरबी सोलंकी व रजिस्ट्रार डॉ. राजेश पूनिया अपने चहेतों की नियुक्ति असिस्टेंट और एसोसिएट प्रोफेसर के रूप में करना चाहते हैं। इस मामले में विवि की तरफ से रजिस्ट्रार डॉ. राजेश पूनिया सामने आए और कहा कि प्रोफेसर बेरवाल अपने चहेते व्यक्ति को नियुक्ति दिलवाना चाहते हैं। दोनों पक्ष एक दूसरे पर चहेतों को लाभ पहुंचाने का आरोप लगा रहे हैं।
जानकारी के लिए रविवार को विवि में नियुक्तियों के लिए साक्षात्कार हुए। इस दौरान प्रोफेसर संदीप बेरलवा ने भर्ती प्रक्रिया में अनियमितता का आरोप लगाकर धरने पर बैठ गए और रातभर बैठे रहे। उन्होंने आरोप लगाया कि रात में दो जानकारों के साथ विवि के कॉन्फ्रेंस हॉल में धरना दे रहे थे तो पुलिस ने जबरन उठाकर बाहर फेंक दिया। बेरवाल ने कहा कि उन्होंने किसी व्यक्ति की सिफारिश नहीं की। उनके एक जानकारी का साक्षात्कार सबसे बेहतर था। चयन समिति ने भी तारीफ करते हुए विवि के लिए सही बताया था। जानकार होने के नाते पक्षपात का आरोप न लगे इसको लेकर उन्होंने साक्षात्कार में सवाल नहीं पूछे। उन्होंने आरोप लगाया कि जिन लोगों की नियुक्ति की गई है, वे शोध के विषय में आधारभूत सवालों का जवाब भी नहीं दे पाए।
वहीं विवि की तरफ से रजिस्ट्रार डॉ. राजेश पूनिया सामने आए और उन्होंने प्राफेसर बेरवाल के सभी आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए कहा कि नियुक्ति की प्रक्रिया पारदर्शी तरीके से हुई है। हर स्तर पर खुद प्रोफेसर संदीप बेरवाल ने हस्ताक्षर किए हैं। पूनिया ने कहा कि बेरवाल ने पहले तो कमेटी के समक्ष अपील की कि उनके द्वारा सिफारिश किए उम्मीदवार का चयन किया जाए। उन्होंने माना कि उक्त उम्मीदवार का साक्षात्कार बहुत अच्छा था, लेकिन शैक्षणिक प्रदर्शन के आधार पर वे पिछड़ गए।
नियुक्ति रद्द करने के लिए राज्यपाल को लिखा पत्र
वहीं इस मामले में प्रोफेसर संदीप बेरवाल ने राज्यपाल को पत्र लिखकर नियुक्तियां रद्द करने और जांच की मांग की है। बेरवाल ने कहा कि इस मामले की न्यायिक जांच करवाई जाए, ताकि सच सामने आ सके।
ऐसे हुई है नियुक्ति
विवि में शनिवार और रविवार को चले साक्षात्कार में कुल 14 एसोसिएट प्रोफेसर और 11 असिस्टेंट प्रोफेसर की नियुक्ति हुई है। इसके लिए प्रक्रिया थी कि विषय विशेषज्ञों को पहले शैक्षणिक मेरिट की जानकारी नहीं दी गई। ताकि इसका असर साक्षात्कार पर न पड़े। ऐसे में प्रोफेसर संदीप बेरवाल द्वारा जिस उम्मीदवार की सिफारिश की गई थी, उसे साक्षात्कार के आधार पर सबसे अधिक 36 अंक दिए। इसके अलावा अन्य उम्मीदवार को 12 से 26 अंक मिले, लेकिन जब शैक्षणिक मेरिट जोड़ी गई तो उनका नाम मेरिट में नहीं आया।
विशेषज्ञों के पत्र के आधार पर कार्यकारी परिषद ने किया निलंबित
रजिस्ट्रार के अनुसार प्रोफेसर संदीप बेरवाल के उम्मीदवार का चयन नहीं होने पर उन्होंने कुलपति व रजिस्ट्रार पर पैसे लेकर नियुक्तियां करने के आरोप लगाए। इतना ही नहीं पंजाबी विवि पटियाला, केंद्रीय विवि व पंजाब विवि चंडीगढ़ से आए विषय विशेषज्ञों को गालियां दीं। इस दौरान राज्यपाल प्रतिनिधि के रूप में एक महिला शिक्षिका भी यहां मौजूद रहीं। इन सभी ने उनके व्यवहार को लेकर शिकायत दी थी। इसके आधार पर कार्यकारी परिषद ने बेरवाल को निलंबित कर दिया है।
कांग्रेस विधायक पहुंचे विवि
इसी मामले में सफीदों के कांग्रेस विधायक सुभाष देशवाल सोमवार सुबह विवि पहुंचे। उन्होंने कहा कि पहले इस मामले की जांच करवाई जाए। जब तक जांच नहीं हो तब तक नियुक्तियां नहीं होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि वे इस मामले को जोर-शोर से उठाएंगे।
गेट पर लगा रहा ताला, लोग परेशान
मामले को देखते हुए सीआरएसयू के मुख्य गेट पर बड़ी संख्या में पुलिस तैनात रही। इस दौरान दूर-दूर से अपने काम करवाने आए विवि के विद्यार्थियों तक को प्रवेश नहीं मिला। बाहर ही पुलिस व विवि के सुरक्षा गार्डों ने उन्हें रोक लिया। सिरसा से पहुंचे सिमरन के अनुसार वह माइग्रेशन के लिए सिरसा पहुुंची हैं, लेकिन प्रवेश नहीं दिया जा रहा है। वहीं विवि की शोध छात्रा सुदेश कुमारी के अनुसार उन्हें प्रवेश शुल्क जमा करवाना है। इसके लिए विवि से ही फोन आया था, लेकिन अब अंदर नहीं जाने दिया जा रहा है। इस पर रजिस्ट्रार डॉ. राजेश पूनिया ने कहा कि प्रोफेसर संदीप बेरवाल ने बाहर से लोगों को बुलाया था। इसके चलते व्यवस्था की गई। ऐसे किसी को परेशानी हो रही है तो व्यवस्था करवाई जाएगी।
विवि के मुख्य गेट पर तैनात पुलिस।- फोटो : Jind
विवि में प्रवेश नहीं मिलने पर परेशान विद्यार्थी।- फोटो : Jind
मामले में अपना पक्ष रखते रजिस्ट्रार डॉ. राजेश पूनिया।- फोटो : Jind