नागरिक अस्पताल में ओपीडी के लिए पंजीकरण करवाने के लिए मरीजों की लगी लंबी-लंबी लाइनें
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नागरिक अस्पताल का विस्तार करके इसे भले ही 200 बेड का कर दिया गया है, लेकिन यहां स्टाफ 100 बेड के अस्पताल के अनुसार भी नहीं है। नागरिक अस्पताल में कुल 55 चिकित्सकों के पद स्वीकृत हैं, लेकिन 17 चिकित्सक ही सेवाएं दे रहे हैं। इनमें से कई तो विभिन्न कार्यक्रमों में व्यस्त रहते हैं। ओपीडी करने के लिए अस्पताल में 10 चिकित्सक भी उपलब्ध नहीं होते हैं। सबसे बड़ी समस्या इमरजेंसी में मेडिकल ऑफिसर की ड्यूटी लगाने की है। इमरजेंसी में कई बार तो मजबूरी वश सर्जन की भी ड्यूटी लगानी पड़ती है। इस कारण नागरिक अस्पताल केवल रेफर सेंटर बनकर रह गया है।
लगभग ढाई वर्ष पहले जींद में रुपये खर्च करके नागरिक अस्पताल के लिए नए भवन का निर्माण तो पूरा कर दिया गया, लेकिन चिकित्सकों की भारी कमी जिले के लोगों को स्वास्थ्य की बेहतर सुविधाएं नहीं मिल पा रही हैं। जिले की आबादी 14 लाख पहुंच चुकी है। नागरिक अस्पताल में प्रतिदिन 1500 मरीज आते हैं। इतने मरीजों पर चिकित्सकों की संख्या नाकाफी है। केवल दंत विभाग में ही आराम से मरीज देखे जाते हैं, बाकी विभागों में मरीजों को निपटाया जाता है। इसे केवल खानापूर्ति ही कहा जा सकता है। नागरिक अस्पताल की फिजिशियन ओपीडी में इलाज की यह खानापूर्ति रोज होती है। प्रतिदिन इस विभाग में छह सौ के लगभग मरीज आते हैं। अस्पताल में कोई फिजीशियन नहीं हैं। जुलाना से फिजिशीयन दो दिन नागरिक अस्पताल में आते हैं।
रेफर सेंटर बना नागरिक अस्पताल
डॉक्टरों की कमी के कारण नागरिक अस्पताल गंभीर मरीजों के लिए केवल रेफर सेंटर बना हुआ है। दुर्घटना के मामलों में आने वाले मरीजों को यहां से पीजीआई रोहतक या मेडिकल कॉलेज खानपुर रेफर किया जाता है। अन्य मरीजों को भी अच्छा इलाज लेने के लिए हिसार, रोहतक, खानपुर या पटियाला का रूख करना पड़ता है।
चिकित्सकों की डिमांड भेजी है
अस्पताल में चिकित्सकों की कमी है, लेकिन जो भी चिकित्सक हैं, उनसे बेहतर कार्य चलाने का प्रयास किया जा रहा है। चिकित्सकों की कमी को लेकर डिमांड स्वास्थ्य निदेशालय को भेजी गई है। जल्द ही चिकित्सक मिलने की उम्मीद है।
डॉ. गोपाल गोयल, एमएस, नागरिक अस्पताल जींद।