जींद। मानसून के दौरान संभावित बाढ़ और जलभराव की स्थिति से निपटने के लिए सिंचाई विभाग के मैकेनिकल सब-डिवीजन ने तैयारियां तेज कर दी हैं। जिले में पानी निकासी व्यवस्था को मजबूत करने के लिए पंपिंग सिस्टम को दुरुस्त किया जा रहा है।
विभाग के मैकेनिकल वाटर सर्विसेज डिवीजन ने इलेक्ट्रिक और डीजल पंप सेटों के सुचारु संचालन के लिए नट-बोल्ट, ग्लैंड, पीवीसी पाइप, फुट वाल्व, क्लैंप, कपलिंग, रबर वॉशर, गैस्केट, होज पाइप, सील और निप्पल समेत अन्य जरूरी सामान की खरीद के लिए टेंडर जारी किया है। विभाग का कहना है कि बारिश के दौरान यदि किसी पंप में तकनीकी खराबी आती है तो उसे तुरंत ठीक कर पानी निकासी का काम जारी रखा जा सकेगा।
जिले में बाढ़ प्रबंधन को लेकर विभाग ने पंपिंग सिस्टम की क्षमता और उपलब्ध संसाधनों की समीक्षा कर ली है। वर्तमान में जिले में 69 डीजल पंप सेट उपलब्ध हैं। इनकी कुल क्षमता 138 क्यूसेक है। इसके अलावा 72 इलेक्ट्रिक पंप लगे हुए हैं, जिनकी संयुक्त क्षमता 198 क्यूसेक है। वहीं जिले के 22 पंप हाउसों पर 57 वर्टिकल पंप स्थापित हैं, जिनकी कुल क्षमता 479 क्यूसेक है।
पंपों की सर्विसिंग पूरी, डीजल पंप रखे स्टैंडबाय
मानसून से पहले सभी पंपों की मोटरों और इंजनों की सर्विसिंग कर उन्हें चालू हालत में रखा गया है। विभाग ने इलेक्ट्रिक पंपों के लिए निर्बाध बिजली आपूर्ति की व्यवस्था की है। इलेक्ट्रिक पंपों के लिए निर्बाध बिजली आपूर्ति सुनिश्चित करने के साथ बिजली बाधित होने की स्थिति में डीजल पंपों को पर्याप्त ईंधन के साथ स्टैंडबाय रखा गया है ताकि राहत कार्यों में कोई व्यवधान न आए। अधिकारियों के अनुसार, जलभराव वाले क्षेत्रों में जरूरत पड़ने पर तुरंत पंप लगाकर पानी निकालने की व्यवस्था की जाएगी। इसके लिए मशीनरी और कर्मचारियों को भी अलर्ट मोड पर रखा गया है।
49 ड्रेनों की सफाई का काम अंतिम चरण में
जल निकासी व्यवस्था को बेहतर बनाने के लिए जिले की ड्रेनों की सफाई भी लगभग पूरी कर ली गई है। जींद यमुना वाटर सर्विसेज सर्कल के अंतर्गत कुल 49 ड्रेन आती हैं। इनमें 23 ड्रेन जींद वाटर सर्विसेज डिवीजन और 26 ड्रेन सफीदों वाटर सर्विसेज डिवीजन के अधीन हैं। मानसून शुरू होने से पहले इन सभी मुख्य और लिंक ड्रेनों की डी-सिल्टिंग कराई जा रही है। साथ ही ड्रेनों में उगी जंगली घास और अन्य अवरोधों को हटाने का काम भी चल रहा है। काम की निगरानी के लिए सुपरिटेंडिंग इंजीनियर स्तर तक अधिकारियों की जिम्मेदारी तय की गई है।
वर्जन
पंपों की तकनीकी तैयारी, पर्याप्त स्टोर सामग्री और साफ ड्रेनों के कारण इस बार मानसून में जलभराव की समस्या से प्रभावी तरीके से निपटा जा सकेगा। जरूरत पड़ने पर राहत और बचाव कार्य बिना देरी के शुरू किए जाएंगे।-
नीरज भारद्वाज, एक्सईएन