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ग्रामीण क्षेत्रों में सिरे नहीं चढ़ पा रही प्रधानमंत्री आवास योजना

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पोली गांव में बरसात से गिरा मकान। संवाद - फोटो : Jind
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जुलाना। प्रधानमंत्री आवास योजना हवा हवाई साबित हो रही है। पिछले 6 साल से केवल सर्वे और फिर सर्वे का ही काम चल रहा है। काफी मकानों की तो जिओ ट्रैकिंग भी हुई, लेकिन किस्त आज तक नहीं आ पाई है। शहरी क्षेत्र में तो गरीबों को आशियाना बनाने के लिए किस्तें आ रही हैं, लेकिन ग्रामीण क्षेत्रों में 2016 के बाद केवल 35 मकानों की किस्त आई है। एक ओर तो सरकार 2022 तक हर सिर पर छत का दावा कर रही है, लेकिन छह साल सर्वे में ही बीत गए। मकान नहीं बनने के कारण गरीबों को जर्जर हुए मकानों में ही दिन काटने को मजबूर होना पड़ रहा है। गांव रधाना में शनिवार रात को मकान की छत गिरने से हुई महिला की मौत के बाद लोगों में भय का माहौल है कि कहीं उनके साथ ही यह हादसा नहीं हो जाए।
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प्रदेश सरकार गरीबों के सिर पर छत बनाने और उनको आवासीय योजना से जोडने के दावे तो कर रही है, लेकिन गांवों में योजनाएं दम तोड़ती नजर आ रही हैं। हर गांव में लगभग 20 से 30 परिवार ऐसे हैं, जो जर्जर मकानों में रहने को मजबूर हैं। पोली गांव निवासी महेंद्र, रामकुमार, जयपाल ने बताया कि उनके मकान इस हालत में हैं कि वह कभी भी गिर सकते हैं। सरकार द्वारा नया मकान बनाने या मुरमत के लिए राशि मुहैया करवाने की मांग की है। बीडीपीओ विभाग द्वारा जुलाना के 38 गांवों में 390 मकानों को जर्जर घोषित किया गया है, लेकिन 6 साल के लंबे अंतराल में केवल 35 मकानों की किस्त आई है। इनमें से 29 मकानों की दो-दो किस्त और 6 मकानों की केवल एक किस्त ही आ पाई है। 2022 का साल बीतने को है लेकिन विभाग द्वारा कंडम घोषित मकानों के 10 फीसदी मकान भी नही बन सकें हैं।
पोली गांव में मकान गिरा, नहीं था कोई अंदर
पोली गांव में भी रविवार रात को एक मकान गिर गया। इस मकान के अंदर हालांकि कोई नहीं था। इसमें रहने वाले शमशेर ने मकान की हालत को देखते हुए दूसरे के मकान के एक कमरे में अपना सामान शिफ्ट कर लिया था। पिछले वर्ष भी पोली गांव में दो मकान गिर गए थे। अलेवा में भी पिछले दिनों एक मकान गिरा था।
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जरा सी बारिश से ही जान आ जाती है हलक में
हर गांव में 6 साल से गरीब अपना आशियाना बनने का इंतजार कर रहे हैं लेकिन इस बीच मकानों की हालत कुछ इस प्रकार है कि जरा सी बारिश होते ही उनकी जान पर बन जाती है, क्योंकि मकानों का लेवल नीचा होने से मकान में बरसात का पानी घुस जाता है। इसके अलावा दीवारें भी काफी कमजोर हो चुकी हैं जोकि कभी भी गिर सकती हैं।
प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत 35 मकानों की किस्त आई है। मुख्यालय से लिस्ट के अनुसार ही मकानों की किस्तें आती हैं। पात्र लोगों की लिस्ट मुख्यालय भेजी जा चुकी है। बाकी बचे हुए मकानों की किस्त भी जल्द मिल जाएगी।
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-रेणुका नांदल, बीडीपीओ, जुलाना।
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