जींद। कोरोना महामारी के दौरान लाखों रुपये खर्च कर खरीदी गईं पीपीई किटें अब कबाड़ बनकर रह गई हैं। गुरुवार सुबह डीसी कार्यालय की छत पर पीपीई किटों के बंडल बिखरे मिलने से प्रशासनिक लापरवाही का बड़ा मामला उजागर हुआ है। मिट्टी से सनी और फटी हुई किटों पर लगे कोरोना काल (2020-2022) के लेबल यह साबित करते हैं कि इन्हें महामारी के समय खरीदा गया था।
बताया जा रहा है कि महामारी खत्म होने के बाद इन किटों को स्टोर रूम में रखा गया था लेकिन जगह की कमी के कारण इन्हें छत पर फेंक दिया गया। न तो इनका कोई रिकॉर्ड रखा गया और न ही उचित तरीके से निस्तारण किया गया। कुछ किटें चूहों द्वारा कुतरी गईं तो कुछ मौसम के प्रभाव से फटकर बिखर गई हैं।
प्रत्येक किट की कीमत लगभग 400 रुपये थी। जिले में करीब 2000 से अधिक पीपीई किटें खरीदी गई थीं। इनकी कुल कीमत लगभग 5 लाख रुपये बताई जा रही है। ये किटें चिकित्सकों, नर्सों और आशा कार्यकर्ताओं की सुरक्षा के लिए खरीदी गई थीं लेकिन इन्हें समय पर स्वास्थ्य कर्मियों तक नहीं पहुंचाया गया। यह घटना न केवल प्रशासनिक लापरवाही को उजागर करती है, बल्कि महामारी के दौरान सरकारी संसाधनों की बर्बादी का एक और उदाहरण बनकर सामने आई है।
डीसी बोले-जांच करवाई जाएगी
यह मामला मेरे संज्ञान में नहीं था। यह कैसे और किसकी लापरवाही से हुआ, इसकी जांच करवाई जाएगी।
-मोहम्मद इमरान रजा, उपायुक्त, जींद