देशभर के पॉलीहाउस किसान संरक्षित खेती के लिए सहायता दरों में बदलाव, लंबित आवेदनों और नए दिशा-निर्देशों के विरोध में आगामी 25 सितंबर 2026 को सुबह 11 बजे राष्ट्रीय बागवानी बोर्ड (एनबीएच) के राज्य कार्यालयों के बाहर शांतिपूर्ण प्रदर्शन करेंगे। यह प्रदर्शन अहमदाबाद, जयपुर, भोपाल, लखनऊ, बेंगलुरु, देहरादून, चंडीगढ़, रायपुर और चेन्नई में आयोजित किए जाएंगे। पॉलीहाउस किसान संघ ने सरकार से अपनी नीतियों में बदलाव करने की पुरजोर मांग की है।
21 अगस्त के परिपत्र को वापस लेने की मांग
किसान संघ की सबसे प्रमुख मांग राष्ट्रीय बागवानी बोर्ड द्वारा 21 अगस्त 2026 को जारी संशोधित परिपत्र को पूरी तरह वापस लेना है। संघ का तर्क है कि बिना किसी पर्याप्त संक्रमण अवधि (ट्रांजिशन पीरियड) के लागू किए गए इस नीतिगत बदलाव से पहले से प्रक्रियाधीन परियोजनाओं में भारी अनिश्चितता पैदा हो गई है। संघ चाहता है कि 21 अगस्त से पहले जमा किए गए सभी पुराने जीओसी आवेदनों को पुराने नियमों के तहत ही संसाधित किया जाए और राहत केवल उन परियोजनाओं तक सीमित न रहे जिनकी जीओसी पहले ही जारी हो चुकी है। जिन किसानों ने पुराने नियमों के तहत आवेदन शुल्क जमा किया और वित्तीय व्यवस्था की, उनके मामलों को पूरी तरह सुरक्षित किया जाए।
नए जीओसी आवेदन और 50% सहायता बहाल करने की मांग
किसानों और संरक्षित खेती से जुड़े उद्योगों ने नए जीओसी आवेदनों को तत्काल प्रभाव से दोबारा शुरू करने की मांग की है। संघ का कहना है कि नए आवेदन लंबे समय तक रोके जाने से न केवल किसानों की नई परियोजनाएं प्रभावित हो रही हैं, बल्कि पॉलीहाउस निर्माता, सामग्री आपूर्तिकर्ता, कृषि विशेषज्ञ और तकनीशियन भी गंभीर संकट में हैं। इसके अलावा, संरक्षित खेती पर मिलने वाली वित्तीय सहायता को 50 प्रतिशत से घटाकर 35 प्रतिशत करने पर गहरी चिंता जताई गई है। किसानों की मांग है कि या तो पुरानी 50 प्रतिशत सहायता बहाल की जाए या फिर बाजार कीमतों के हिसाब से परियोजना लागत के मानकों को संशोधित किया जाए।
अन्य प्रमुख मांगें और प्रदर्शन की रूपरेखा
प्रदर्शन के दौरान किसान परिवार आधारित पात्रता नियमों की समीक्षा, किसान समूहों को फिर से मान्यता देने, 50,000 रुपये प्लस जीएसटी आवेदन शुल्क पर पुनर्विचार और पॉलीहाउस घटकों पर जीएसटी को 18 प्रतिशत से घटाकर 5 प्रतिशत करने की मांग भी प्रमुखता से उठाएंगे।
संघ ने सभी प्रभावित किसानों से अपील की है कि वे इस शांतिपूर्ण और अनुशासित प्रदर्शन में शामिल हों। साथ ही, किसानों से कहा गया है कि वे अपने जीओसी दस्तावेज, बैंक स्वीकृति पत्र, आवेदन पत्र और परियोजना से जुड़े सभी कागजात व छायाचित्र अपने साथ जरूर लाएं ताकि प्रशासन के सामने मजबूत पक्ष रखा जा सके।